नगर पालिका धनपुरी की लापरवाही बेनकाब सीसीटीवी और सुरक्षाकर्मियों के बावजूद लाखों की चोरी, मिलीभगत के आरोपों से गरमाई सियासत

धनपुरी। मोहम्मद असलम बाबा धनपुरी की नगर पालिका एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। सीसीटीवी कैमरे लगे होने और नाइट शिफ्ट में सुरक्षाकर्मी तैनात रहने के बावजूद नगर पालिका कार्यालय के सामने स्थित गोदाम से लाखों रुपये का कीमती सामान चोरी हो जाना प्रशासनिक व्यवस्थाओं की पोल खोल रहा है।
सूत्रों के अनुसार, यह कोई पहली घटना नहीं है। पूर्व में भी इसी प्रकार की चोरी की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन आज तक किसी भी मामले में ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बताया जा रहा है कि नगर पालिका के कुछ कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से पहले चोरी करवाई जाती है और बाद में अधिकारियों को “मनगढ़ंत कहानी” सुनाकर बड़ी घटना को छोटी बताकर रफा-दफा कर दिया जाता है, ताकि मामला पुलिस तक न पहुंचे।
कीमती सामान पर चोरों की नजर
जानकारी के मुताबिक, नगर पालिका की गाड़ियों में लगी महंगी बैटरियां, कॉपर वायर और अन्य कीमती पार्ट्स को चोर आसानी से निशाना बनाकर फरार हो जाते हैं। सवाल यह उठता है कि जब परिसर में सीसीटीवी कैमरे सक्रिय हैं और सुरक्षा कर्मी तैनात हैं, तो फिर यह चोरी किसकी शह पर हो रही है?
प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल
मुख्य नगर पालिका अधिकारी सुश्री पूजा बुनकर पर भी गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि वे अधिकतर समय अपने वातानुकूलित कक्ष में बैठकर बाहरी ठेकेदारों से चर्चा में व्यस्त रहती हैं, जबकि शहर की मूलभूत समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
नगर में पेयजल संकट गहराया हुआ है, सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है और कई वार्डों में कूड़े के ढेर लगे हैं। बाजार रंगमंच क्षेत्र में कन्या स्कूल के सामने कूड़े का अंबार लगा हुआ है। नालियां गंदगी से अटी पड़ी हैं, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है।
फॉगिंग मशीन बनी शोपीस
मच्छरों से निपटने के लिए लाखों रुपये खर्च कर फॉगिंग मशीन खरीदी गई, लेकिन नगर में उसका उपयोग न के बराबर बताया जा रहा है। इसी तरह फिनायल, कीटनाशक दवाइयों और चूने की खरीद पर भी भारी खर्च किया गया, परंतु इनका धरातल पर उपयोग दिखाई नहीं देता।
भूमि पूजन तक सीमित प्रशासन?
नगर में चर्चा है कि अधिकारी भूमि पूजन और शिलान्यास जैसे आयोजनों में सक्रिय नजर आते हैं, जबकि पेयजल, सफाई और सुरक्षा जैसे बुनियादी मुद्दों पर ठोस पहल नहीं दिखती।
अब सवाल यह है कि जब करोड़ों के बजट वाली नगर पालिका में चोरी, अव्यवस्था और कथित भ्रष्टाचार के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं, तो जिम्मेदारी तय कब होगी? क्या उच्च स्तर से जांच बैठाई जाएगी या फिर यह मामला भी पूर्व की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा?



