अंतिम व्यक्ति तक न्याय ही सामाजिक न्याय का उद्देश्य – जिला न्यायाधीश हिदायत उल्ला खान
विश्व सामाजिक न्याय दिवस पर देपालपुर में विधिक जागरूकता का गरिमापूर्ण आयोजन

देपालपुर(इंदौर) – विश्व सामाजिक न्याय दिवस के अवसर पर तहसील विधिक सेवा समिति, देपालपुर के तत्वावधान में एक विशेष विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन समिति के अध्यक्ष एवं जिला न्यायाधीश हिदायत उल्ला खान की अध्यक्षता में किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक न्याय, समानता, सामाजिक सुरक्षा एवं विधिक अधिकारों की सुलभ पहुँच सुनिश्चित करना रहा।
अपने सारगर्भित उद्बोधन में जिला न्यायाधीश श्री हिदायत उल्ला ख़ान ने कहा कि सामाजिक न्याय केवल एक दिवस मनाने का विषय नहीं है, बल्कि यह सतत् प्रयासों, संवेदनशील सोच और विधिक जागरूकता के माध्यम से सशक्त समाज के निर्माण की आधारशिला है।
उन्होंने कहा कि लोक अदालत, वैकल्पिक विवाद निस्तारण प्रणाली तथा विधिक सेवा प्राधिकरण की योजनाएँ आमजन को सरल, सुलभ एवं त्वरित न्याय उपलब्ध कराने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, श्रमिकों, बच्चों एवं वंचित वर्गों को उनके संवैधानिक एवं विधिक अधिकारों के प्रति जागरूक होने का आह्वान किया तथा निःशुल्क विधिक सहायता योजनाओं का अधिकाधिक लाभ लेने हेतु प्रेरित किया।
कार्यक्रम को वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेंद्र वर्मा एवं मनोज देसाई ने भी संबोधित कर सामाजिक न्याय की अवधारणा, लोक अदालत की भूमिका, वैकल्पिक विवाद निस्तारण, तथा कमजोर वर्गों के संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।
सभी वक्ताओं ने विधिक साक्षरता को सामाजिक न्याय की रीढ़ बताते हुए कहा कि जब तक आम नागरिक अपने अधिकारों और कर्तव्यों से परिचित नहीं होगा, तब तक न्याय की परिकल्पना पूर्ण नहीं हो सकती। अधिवक्ताओं ने विधिक सेवा गतिविधियों में निरंतर सहयोग देने का आश्वासन भी दिया।
कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेंद्र वर्मा, सचिव दिनेश डोंड,जी.के.नायक, पंकज तिवारी, प्रकाश धाकड़, मनोज देसाई, विजयपुरी गोस्वामी, उमेश पटेल, अतीक़ ख़ान, चिंतामन परिहार, अर्जुन नागर,चेतन राठौर, प्रवीण रावल, श्रीराम भदौरिया एवं नायब नाजिर दिलीप यादव सहित बड़ी संख्या में अधिवक्तागण एवं न्यायालयीन कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का सफल संचालन सचिव दिनेश डोंड द्वारा किया गया, जबकि अधिवक्ता प्रकाश धाकड़ द्वारा आभार व्यक्त किया गया।
कार्यक्रम का समापन सामाजिक समरसता, आपसी सौहार्द एवं न्याय के मूल्यों को व्यवहार में उतारने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। यह आयोजन न केवल विधिक जागरूकता की दिशा में एक सशक्त पहल सिद्ध हुआ, बल्कि समाज में न्याय, समानता और मानव गरिमा की भावना को और अधिक सुदृढ़ करने का प्रेरक संदेश भी देकर गया।



