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बाल विवाह मुक्त भारत सड़ियाकुआ हाई स्कूल में जागरूकता कार्यशाला, बच्चों ने लिया संकल्प

 

राजगढ़, देश को बाल विवाह जैसी कुप्रथा से मुक्त करने के उद्देश्य से महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत शुरू किए गए 100 दिवसीय जागरूकता महाअभियान का समापन बुधवार को सड़ियाकुआ स्थित हाई स्कूल में भव्य कार्यशाला के रूप में किया गया। कार्यक्रम में सैकड़ों विद्यार्थियों को बाल विवाह के सामाजिक, शैक्षणिक और कानूनी दुष्परिणामों से अवगत कराया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के पूजन एवं माल्यार्पण के साथ हुआ। इसके बाद मंचासीन अतिथियों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम का संचालन अहिंसा वेलफेयर सोसायटी के प्रोजेक्ट मैनेजर नरेंद्र व्यास ने किया, जिन्होंने अभियान की रूपरेखा और उद्देश्यों की जानकारी दी।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए अहिंसा वेलफेयर सोसायटी के संचालक अरुण सतालकर ने कहा कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय है। उन्होंने बताया कि बाल विवाह कानूनन अपराध है और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। साथ ही उन्होंने बाल विवाह की रोकथाम में समाज, विद्यालय और अभिभावकों की भूमिका पर विशेष जोर दिया।

विद्यालय के प्राचार्य फूलसिंह चौहान ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि बाल विवाह बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा है। शिक्षिका बिंदेश्वरी ने बाल विवाह के खात्मे के लिए जागरूकता को सबसे प्रभावी हथियार बताते हुए छात्रों से इसे अपने परिवार और समाज तक पहुंचाने का आह्वान किया।

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