हिमालयी क्षेत्रों में भूस्खलन से निपटने पर मंथन,देश-विदेश के वैज्ञानिक और विशेषज्ञ देहरादून में जुटे

देहरादून:हिमालयी क्षेत्रों में भूस्खलन के बढ़ते खतरे और सुरक्षित विकास को लेकर देहरादून में मंथन शुरू हो गया है। उत्तराखण्ड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र की ओर से हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में आपदा-सक्षम विकास विषय पर आयोजित पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। यह कार्यक्रम 2 से 6 फरवरी तक पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण एवं वित्तीय प्रशासन अनुसंधान संस्थान, सुद्धोवाला में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें देश-विदेश के वैज्ञानिक और विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।
कार्यक्रम के उद्घाटन पर आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील है और यहां विभिन्न आपदाओं की आशंका बनी रहती है। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य भूस्खलन जोखिम को वैज्ञानिक रूप से समझना, सुरक्षित अवसंरचना विकसित करना और आपदा पुनर्बहाली तंत्र को मजबूत करना है।
कार्यशाला में नॉर्वे के भू-तकनीकी संस्थान के विशेषज्ञ ढलान स्थिरता, सॉइल नेलिंग, जल निकासी और उपग्रह आधारित जोखिम मानचित्रण पर प्रशिक्षण दे रहे हैं। वहीं, भूस्खलन विशेषज्ञ डॉ. हाकोन हेयर्डल ने वैज्ञानिक अध्ययन, बेहतर पूर्व चेतावनी और अंतरराष्ट्रीय अनुभव साझा करने की आवश्यकता बताई।
विश्व बैंक प्रतिनिधि अनुप करण्थ ने कहा कि 2013 की आपदा के बाद से उत्तराखण्ड में आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर लगातार सहयोग किया जा रहा है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत प्रतिभागियों ने हरिद्वार स्थित मनसा देवी भूस्खलन क्षेत्र का क्षेत्रीय भ्रमण भी किया, जहां वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर जोखिम विश्लेषण और न्यूनीकरण उपायों का व्यावहारिक अध्ययन कराया गया।
कार्यशाला में यूएलएमएमसी, यूएसडीएमए, नेपाल, भूटान सहित विभिन्न संस्थानों के अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हुए।




