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रांची में प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने पर चर्चा

रांची (SHABD) : रांची में आज वन पर्यावरण विभाग द्वारा कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने पर चर्चा हुई। मौके पर वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति सभी स्टेक होल्डर्स को सजग रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को आर्थिक अवसर में बदला जा सकता है। वक्ताओं ने डीएमएफ फंड के उपयोग पर जोर दिया। वन,पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से रांची में “फर्स्ट स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन वर्कशॉप फॉर डेवलपिंग कार्बन क्रेडिट प्रोजेक्ट्स” पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कार्यशाला आयोजित की गई। ‘लीवरेजिंग कार्बन मार्केट: ए क्लाइमेट रेजोल्यूशन फॉर झारखंड’ के बैनर तले हुए इस कार्यक्रम में कई विभाग एक मंच पर आए। इसमें रूरल डेवलपमेंट, एग्रीकल्चर, माइनिंग, इंडस्ट्रीज डिपार्टमेंट, म्युनिसिपल कॉरपोरेशन, स्टेट वाटरशेड मिशन, एनर्जी डिपार्टमेंट, नाबार्ड, जेएसएलपीएस, स्किल इंस्टीट्यूट और इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेस्ट प्रोडक्टिविटी के अधिकारी मौजूद रहे। सभी विभागों ने देश-दुनिया में बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताई। चर्चा हुई कि झारखंड जैसे वन-खनिज समृद्ध राज्य के लिए कार्बन क्रेडिट बड़ा अवसर है। इससे किसान, वन आश्रित समुदाय और उद्योग तीनों को फायदा मिल सकता है। मौजूदा बढ़ता पॉल्यूशन और प्रकृति के साथ छेड़छाड़ पूरे देश-दुनिया के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। अगर अभी इसे कंट्रोल नहीं किया गया, तो प्राकृतिक परिवर्तन और तेज होगा। इसका सीधा असर देश के जन-जीवन, खेती, पानी और स्वास्थ्य पर पड़ेगा। कार्बन मार्केट के जरिए हम पर्यावरण संरक्षण को आर्थिक अवसर में बदल सकते हैं। कार्यशाला में बताया गया कि कैसे एग्रोफॉरेस्ट्री, सोलर एनर्जी, वेस्ट मैनेजमेंट और माइनिंग रिक्लेमेशन से कार्बन क्रेडिट जेनरेट किए जा सकते हैं। नाबार्ड और जेएसएलपीएस ने किसानों को इससे जोड़ने का रोडमैप रखा। विशेषज्ञों ने कहा कि झारखंड के 29% वन क्षेत्र और डीएमएफटी फंड का सही इस्तेमाल कर राज्य कार्बन ट्रेडिंग में लीड ले सकता है। इससे ग्रीन फंडिंग भी आएगी।

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