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आईआईएम बोधगया में 21 देशों के प्रतिभागियों के साथ हुआ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन

बोधगया : आईआईएम बोधगया में “बदलती वैश्विक परिस्थितियों में नेतृत्व” विषय पर पाँच दिवसीय मैनेजमेंट डेवलपमेंट प्रोग्राम (एमडीपी) का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जनवरी 2026 में भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के सहयोग से इंडियन टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन (ITEC) पहल के तहत संपन्न हुआ।

इस कार्यक्रम में 21 देशों से आए कुल 33 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें 17 महिलाएँ और 16 पुरुष शामिल थे। प्रतिभागियों ने लैटिन अमेरिका से लेकर रूस तक विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व किया। कार्यक्रम का उद्देश्य वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच पेशेवरों को प्रभावी नेतृत्व के लिए तैयार करना था।

एमडीपी के दौरान अकादमिक गहराई के साथ-साथ व्यावहारिक सीख पर विशेष जोर दिया गया। माइंडफुल लीडरशिप, नेतृत्व में लचीलापन, नैतिक निर्णय-निर्माण, रणनीतिक सोच तथा जटिल परिस्थितियों से निपटने जैसे विषयों पर आयोजित सत्रों के माध्यम से अंतर-सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा मिला और वैश्विक नेतृत्व के दृष्टिकोण को मजबूती मिली।

इस कार्यक्रम की एक प्रमुख विशेषता इसका अनुभव-आधारित और सहभागी शिक्षण मॉडल रहा, जो कक्षा तक सीमित नहीं था। प्रतिभागियों ने प्राचीन नालंदा खंडहरों और यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल महाबोधि मंदिर का भ्रमण किया, जहाँ माइंडफुलनेस, आत्म-नियंत्रण और चिंतनशील नेतृत्व पर विशेष रूप से तैयार सत्र आयोजित किए गए। इन अनुभवों ने प्रतिभागियों को भारत की प्राचीन सभ्यतागत समझ से सीखने और उसे आधुनिक प्रबंधन पद्धतियों से जोड़ने का अवसर प्रदान किया।

कार्यक्रम का समापन आईआईएम बोधगया की निदेशक डॉ. विनिता एस. सहाय और डॉ. टीना भारती द्वारा किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कार्यक्रम की सफलता पर प्रकाश डालते हुए वैश्विक स्तर पर सार्थक सहभागिता और नेतृत्व क्षमता के विकास को रेखांकित किया। उन्होंने ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता पर बल दिया, जो रणनीतिक समझ के साथ-साथ संवेदनशीलता, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना को भी समान महत्व दे।

भूटान से आए प्रतिभागी उग्येन ल्हेंदुप ने कहा, “मैं यहाँ से सीख, हँसी और दुनिया भर से बनी मित्रताओं की यादों के साथ और अधिक समृद्ध होकर लौट रहा हूँ।”

वहीं, वियतनाम के लॉन्ग गुयेन ने कहा, “आईआईएम बोधगया से मैं केवल प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि ऐसा अनुभव लेकर जा रहा हूँ जिसने मुझे अधिक जागरूक और नेतृत्व के लिए बेहतर रूप से तैयार किया है।”

ताजिकिस्तान की सितोरा ने भी साझा किया कि सत्रों और आपसी संवाद ने उनके सोचने के दृष्टिकोण को व्यापक बनाया और कार्यक्रम के दौरान बनी मित्रताएँ लंबे समय तक उनके साथ रहेंगी।

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