बिहार-झारखण्‍ड

किऊल–गया रेलखंड का दोहरीकरण बना बिहार के विकास की नई रफ्तार

किऊल : बिहार में विकास को गति देने में भारतीय रेलवे की भूमिका लगातार सशक्त होती जा रही है। किऊल–गया रेलखंड का दोहरीकरण इसका प्रमुख उदाहरण बनकर सामने आया है। लखीसराय स्थित किऊल स्टेशन से गया जंक्शन तक लगभग 125 किलोमीटर लंबे इस रेलखंड का दोहरीकरण कार्य करीब एक वर्ष पूर्व पूर्ण कर लिया गया, जिसके बाद क्षेत्रवासियों को रेल यात्रा में बड़ी राहत मिली है।

दोहरीकरण से पहले यह रेलखंड सिंगल लाइन था, जिसके कारण ट्रेनों को बार-बार रुकना पड़ता था और यात्रियों को घंटों तक देरी का सामना करना पड़ता था। अब दोहरीकरण के बाद ट्रेनों की अधिकतम गति बढ़कर 110 किलोमीटर प्रति घंटा हो गई है। परिणामस्वरूप, जहां पहले 125 किलोमीटर की दूरी तय करने में लगभग 6 घंटे लगते थे, वहीं अब यह सफर मात्र साढ़े तीन घंटे में पूरा हो रहा है।

इस रेलखंड के दोहरीकरण से लखीसराय, शेखपुरा, नवादा और गया जिलों के लाखों लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है। दैनिक रूप से यात्रा करने वाले छात्र, नौकरीपेशा लोग, व्यापारी और छोटे व्यवसायी अब समय पर, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा कर पा रहे हैं। साथ ही मालगाड़ियों की आवाजाही सुगम होने से माल ढुलाई में समय की बचत हो रही है, जिससे व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला है।

बेहतर रेल कनेक्टिविटी के कारण उद्योगपतियों का रुझान भी अब इस क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है। इससे निवेश के नए अवसर पैदा हो रहे हैं और चारों जिलों में रोजगार सृजन के साथ-साथ विकास की गति तेज हो गई है।

Related Articles

Back to top button