नशे में कानून, सवालों में सुरक्षा
क्या देशभक्ति और जनसेवा का उद्देश्य अब ढाबों तक सिमट गया है?

अवैध शराब पर कौन करे सवाल?
एमसीबी में ‘नशे में पुलिसिंग’ के आरोप, व्यवस्था पर उठे गंभीर प्रश्न
एमसीबी, मनेन्द्रगढ़।सरगुजा रेंज के आईजी दीपक झा लगातार पुलिसकर्मियों को नशे से दूर रहकर अनुशासित और जिम्मेदार पुलिसिंग का संदेश देते रहे हैं। वहीं एमसीबी जिले की पुलिस अधीक्षक श्रीमती रत्ना सिंह भी विभाग में कसावट, पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के प्रयास करती रही हैं।
इसके बावजूद ज़मीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर पेश करती नजर आ रही है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिले में वर्षों से एक ही थाने में पदस्थ कुछ पुलिसकर्मी पहले भी गंभीर आरोपों के घेरे में रह चुके हैं। जनता की मांग है कि ऐसे कर्मियों की पहचान कर तत्काल स्थानांतरण कर दूसरे जिलो के पुलिसकर्मियो की पदस्थापना की जाए, ताकि अवैध शराबखोरी और शराब तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
लोगों का कहना है कि लंबे समय से जमे रहने के कारण कुछ पुलिसकर्मियों की अवैध कारोबारियों से कथित सेटिंग बन गई है, जिसकी वजह से उन्हें खुला संरक्षण मिल रहा है।
यू-टर्न ढाबा फिर चर्चा में
बीती रात मनेन्द्रगढ़ स्थित यू-टर्न ढाबा एक बार फिर चर्चा का केंद्र बना, जहाँ रात्रि गश्त के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों की मौजूदगी और गतिविधियों ने कई सवाल खड़े कर दिए।यह आरोप पुलिस की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से नहीं लगाए जा रहे, बल्कि वे सवाल हैं जो जनता की आंखों ने देखे और ज़मीर ने महसूस किए।
*ग़ज़ल से व्यंग्य तक : जब कानून पर नशे का साया*
“शराब चीज़ ऐसी है जो न छोड़ी जाए…”—स्वर्गीय पंकज उधास की यह पंक्ति आज एमसीबी में कानून-व्यवस्था पर करारा व्यंग्य बनती प्रतीत हो रही है।
सूत्रों के अनुसार, जनता की सुरक्षा की शपथ लेने वाले कुछ पुलिसकर्मी कथित तौर पर शराब के नशे में ड्यूटी निभाने के आरोपों का सामना कर रहे हैं।जहाँ एक ओर पूरा छत्तीसगढ़ ठंड के मौसम में घरों तक सिमटा हुआ है, वहीं छत्तीसगढ़–मध्यप्रदेश सीमा से लगा नवगठित जिला एमसीबी अवैध शराब तस्करी को लेकर पूरे प्रदेश में बदनामी झेल रहा है।
शराब तस्कर ने बदला पैटर्न, ‘सेटिंग’ से खुली राह?
सूत्र बताते हैं कि सीमावर्ती इलाकों से आने वाले शराब तस्कर अब पुराने रास्तों के बजाय नए पैटर्न पर काम कर रहे हैं।आरोप है कि यह तस्करी कुछ पुलिस और आबकारी कर्मियों से मेलजोल और कथित सांठगांठ के जरिए संचालित हो रही है।कहा जा रहा है कि तस्कर पुलिसकर्मियों को महंगे तोहफों और होटल-ढाबों में शराब पार्टियों के जरिए साधते हैं और बदले में अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई नहीं होती।
रात्रि गश्त या गुमराह करने का खेल?
सूत्रों का दावा है कि रात्रि गश्त को कागजों में सक्रिय दिखाने के लिए कुछ मामलों में पुलिसकर्मी अपने मोबाइल अन्य कर्मचारियों को सौंप देते हैं।वे एटीएम, मंदिर, बस स्टैंड और घनी बस्तियों से फोटो-वीडियो बनाकर भेजते हैं, जिससे वरिष्ठ अधिकारियों को सक्रिय गश्त का आभास कराया जा सके।
नाम न छापने की शर्त पर एक कर्मचारी का कहना है
“साहब लोग अंदर शराब पी रहे होते हैं। मोबाइल हमें दे दिया जाता है। हम बताए गए लोकेशन से फोटो-वीडियो भेजते हैं। बाद में फोन आता है और मोबाइल वापस ले लिया जाता है।”
कम बैक के साथ पुलिसकर्मियों को शानदार पार्टी
बीते दिनों खबर प्रकाशन के बाद से अपना ठिकाना बदल कर शराब माफिया राकेश जायसवाल उर्फ़ झींगा वर्तमान समय मे एम सी बी जिले के खड़गवा को अपना ठिकाना बना रखा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शराब माफिया राकेश जायसवाल उर्फ़ झींगा सफ़ेद कलर की बिना नंबर प्लेट की गाड़ी से घूम घूम कर शराब का कारोबार कर रहा है। पूर्व मे खबर प्रकाशन के बाद शराब माफिया बुढ़ार मध्यप्रदेश से वापस आ कर फिर से आपने काम को अंजाम दे रहा है सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शराब माफिया झींगा अपना मोबाइल घर मे छोड़ कर उसी नंबर को आपने दूसरे मोबाइल मे व्हाट्सप्प एप्प के माध्यम से कॉलिंग और मैसेज से अपना अवैध कारोबार चला रहा है। जानकारों ने बताया की कल रात मे मनेन्द्रगढ़ थाने मे तैनात कुछ पुलिस कर्मियों को यू टर्न ढाबे मे अपने वापस आने की खुशी पार्टी दिया और देर रात तक अपने शराब तस्करी को अंजाम देने के लिए शहर मे घूमता रहा।
शासकीय गाड़ियों की मौजूदगी से बढ़ा संदेह
यू-टर्न ढाबा परिसर में शासकीय बोलेरो (CG-02-AQ-0832) और स्कॉर्पियो की मौजूदगी ने संदेह को और गहरा कर दिया है।कड़ाके की ठंड में कुछ पुलिसकर्मियों द्वारा शराब के सहारे रात्रि गश्त का “आनंद” लेने की चर्चाएं आम हैं।
सवाल सीधा है…..
जो पुलिसकर्मी नशे में ड्यूटी कर रहे हों, वे जनता की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करेंगे?
तीसरी आंख क्या खोलेगी सच्चाई?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि रात 12 से 1 बजे के बीच यू-टर्न ढाबा और आसपास के मार्गों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो सच्चाई खुद सामने आ जाएगी।
तब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
सवाल जो जवाब चाहते हैं
क्या एमसीबी जिले में नशे में ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों की पहचान सार्वजनिक होगी?
क्या शासकीय वाहनों के दुरुपयोग की विभागीय जांच कराई जाएगी?
क्या अवैध शराब तस्करी बिना अंदरूनी संरक्षण के संभव है?
क्या पुलिस और आबकारी विभाग इन आरोपों पर पारदर्शी और निष्पक्ष कार्रवाई करेंगे?
जनता अब सिर्फ चर्चाएं नहीं, स्पष्ट जवाब और ठोस कार्रवाई चाहती है।
क्योंकि जब कानून ही सवालों के घेरे में हो, तो सुरक्षा आखिर किससे मांगी जाए?


