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कागज़ पर आंकड़े बढ़ाने की होड, जमीन पर परेशान कर्मचारी और पशुपालक

कर्मचारियों पर 8–10 कृत्रिम गर्भाधान रोज़ करने का दबाव, वैज्ञानिक मानकों की उड़ रही धज्जियाँ

राजगढ़
राज्य के पशुपालन विभाग में प्रशासनिक अधिकारियों की मनमानी एक बार फिर सुर्खियों में है। जानकारी के अनुसार, विभाग द्वारा कृत्रिम गर्भाधान जैसे प्राकृतिक और तकनीकी कार्य पर अव्यावहारिक लक्ष्य थोपे जा रहे हैं, जिसके कारण फील्ड में काम कर रहे कार्यकर्ता भारी तनाव में हैं। सोमवार को सहायक पशु चिकित्सा
क्षेत्र अधिकारी संघ, राजगढ़ ने सीएम के नाम ज्ञापन सौपा l
आवेदन ने बताया गया की
अधिकारी सिर्फ कागजी आंकड़े बढ़ाने के लिए एक-एक कर्मचारी पर 8 से 10 कृत्रिम गर्भाधान प्रतिदिन करने का दबाव डाल रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कृत्रिम गर्भाधान एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, और आदर्श परिस्थितियों के बिना इसे जबरन बढ़ाना संभव नहीं। ऐसे आदेश पशुपालकों के हित के खिलाफ बताए जा रहे हैं।
वहीं कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने इस मुद्दे पर कई बार वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा की, लेकिन तकनीकी समझ के अभाव में अधिकारी मनमानी आदेश जारी कर रहे हैं, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है।
इसी बीच मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले में तुरंत संज्ञान लेने और अमानवीय लक्ष्य प्रणाली पर रोक लगाने की मांग उठी है। पशुपालन क्षेत्र से जुड़े जानकार मानते हैं कि यदि यह दबाव जारी रहा तो उन्नत नस्ल और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने का मूल उद्देश्य ही खतरे में पड़ जाएगा।
ज्ञापन देने में
होकमचंद संजोदिया अध्यक्ष,
जाहिद अली खान सचिव,
रामबाबू दांगी,
हेमराज धाकड़,
अरविंद दांगी,
जगदीश चंद राठौर,
पी.एस. चंद्रावत,
जुनेद अली,
श्रीमती अर्चना यादव,
श्रीमती उपासना सिंह,
कुं सदफ मंसूरी,
नेमीचंद जाटव,
शुभम सक्सेना,
विशाल वर्मा,
15. देव सिंह सिसोदिया
16. हरीश दांगी
राकेश वर्मा आदि लोग शामिल हुए।

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