परसुलिया में कब्रिस्तान संकट,हाईवे ने छीनी आदि जमीन,बाकी मोहनपुरा डैम में डूबी

राजगढ ब्यावरा, यूं तो सरकार सबका विकास सबका,विश्वास एवं सबका साथ की बात करती है लेकिन,आज हम आपको राजगढ़ जिले की तहसील ब्यावरा के ग्राम परसुलिया की एक ऐसी दर्दनाक तस्वीर दिखाने जा रहे हैं, जहाँ जिंदा लोगों के साथ-साथ मरने वालों को भी अपना हक नहीं मिल रहा।
यहाँ के मुस्लिम समुदाय की पुश्तैनी कब्रिस्तान की जमीन… एक तरफ हाईवे खा गया और दूसरी तरफ मोहनपुरा डैम के पानी में डूब गई।”
“परसुलिया के ग्रामीण बताते हैं कि हाईवे निर्माण में आधी कब्रिस्तान की जमीन चली गई और जो थोड़ी बहुत बची थी, वह मोहनपुरा परियोजना के बैक वाटर के जद में आ गई। आज हालात ये हैं कि कब्रिस्तान में 2 से 3 फीट पानी भरा है, हाल ही में हुए परसुलिया के सदर मरहूम लतीफ खान के अंतिम संस्कार के लिए जब बचे हुए टापू पर कब्र की खुदाई की गई तो वहां पर खुदाई में पानी ही पानी निकल रहा था ऐसे में ग्रामीणों ने नीचे वृक्ष के पत्ते, सीमेंट के कट्टे, एवं लकड़ी के बुरादे की कब्र में परत चढ़ाई फिर सुपुर्दे खाक किया, ऐसे में अंतिम संस्कार करना नामुमकिन हो गया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार प्रशासन के दरवाजे खटखटाए, आवेदन दिए, जल सत्याग्रह किया, लेकिन प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। और तो और, इस जमीन का आज तक एक रुपये का मुआवजा भी नहीं दिया गया।”
“तो सवाल ये उठता है कि जब विकास के नाम पर किसी समुदाय की धार्मिक आस्था की जमीन ली जाती है, तो उसके बदले वैकल्पिक व्यवस्था करना क्या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है? परसुलिया के लोग आज भी इंतजार में हैं कि कब प्रशासन जागेगा और उनके मृतकों को सम्मान की आखिरी जमीन मिलेगी।



