मध्यप्रदेश

जेल की दीवारें सजा नहीं, आत्म-सुधार का केंद्र बनें: जिला न्यायाधीश

देपालपुर सब-जेल में विश्व स्वास्थ्य दिवस पर विशेष शिविर; जज हिदायत उल्ला खान बोले— 'स्वास्थ्य ही जीवन की असली पूंजी'

 

देपालपुर (इंदौर) भारतीय संविधान हर नागरिक को सम्मान और गरिमा के साथ जीने का अधिकार देता है, और इस अधिकार का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है—बेहतर स्वास्थ्य। इसी विचार को धरातल पर उतारते हुए विश्व स्वास्थ्य दिवस के उपलक्ष्य में देपालपुर सब-जेल में एक भव्य स्वास्थ्य सेवा एवं विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। तहसील विधिक सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम ने बंदियों के बीच आशा और सुधार की एक नई किरण जगाई है।

गरिमापूर्ण जीवन के लिए स्वास्थ्य अनिवार्य

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं तहसील विधिक सेवा समिति के अध्यक्ष, जिला न्यायाधीश हिदायत उल्ला खान ने बंदियों को संबोधित करते हुए भावुक और ओजस्वी विचार रखे। उन्होंने कहा कि “स्वास्थ्य ही जीवन का वास्तविक धन है। अगर शरीर स्वस्थ है और मन संतुलित, तो इंसान दुनिया की किसी भी कठिन परिस्थिति और संघर्ष पर विजय प्राप्त कर सकता है।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका केवल दंड देने के लिए नहीं है, बल्कि व्यक्ति के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए भी प्रतिबद्ध है। न्यायाधीश खान ने कहा कि कारागार को केवल दंड भुगतने की जगह नहीं, बल्कि ‘पुनर्निर्माण केंद्र’ के रूप में देखा जाना चाहिए, जहाँ से व्यक्ति एक बेहतर इंसान बनकर समाज में वापस लौटे।

नशे से दूरी और योग पर जोर

न्यायाधीश ने बंदियों को जीवन के पाँच स्वर्णिम सूत्र दिए:

नशामुक्ति: व्यसनों से दूर रहकर ही मानसिक शांति संभव है।

स्वच्छता: स्वस्थ रहने के लिए परिवेश और स्वयं की स्वच्छता सर्वोपरि है।

संतुलित आहार: जेल प्रशासन द्वारा दिए जाने वाले पोषण का सही महत्व समझें।

योग और साधना: तनाव मुक्त रहने के लिए योग को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।

सकारात्मक सोच: अपराध बोध से बाहर निकलकर भविष्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखें।

न्यायिक और जेल प्रशासन की एकजुटता

शिविर के दौरान न्यायिक अधिकारियों ने बंदियों से सीधे संवाद किया और उनकी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को सुना। इस अवसर पर सीनियर सिविल जज रिजवाना कौसर, सुमित्रा ताहेड़ और दिव्या श्रीवास्तव ने भी विधिक अधिकारों की जानकारी दी।

जेल प्रशासन की ओर से सहायक जेल अधीक्षक आर. एस. कुशवाह ने विश्वास दिलाया कि बंदियों के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए जेल प्रबंधन निरंतर प्रयासरत है। कार्यक्रम में प्रमुख मुख्यप्रहरी रामेश्वर झणिया, मुख्य प्रहरी रामकरण सोंनगर सहित शिवानी श्रीवास्तव (मेल नर्स) ने चिकित्सा परामर्श में सहयोग प्रदान किया।

“कारागार केवल दंड का स्थान नहीं, बल्कि आत्म-सुधार और स्वयं को फिर से गढ़ने का एक अवसर है। सकारात्मक ऊर्जा ही आपको समाज की मुख्यधारा से जोड़ेगी।”

— हिदायत उल्ला खान, जिला न्यायाधीश

आत्मबल और सुधार की नई चेतना

शिविर का समापन बंदियों के उत्साह और संकल्प के साथ हुआ। कई बंदियों ने इस दौरान योग और अनुशासन को अपनाने की शपथ ली। यह आयोजन न केवल एक औपचारिक जागरूकता कार्यक्रम था, बल्कि इसने जेल के भीतर एक मानवीय वातावरण निर्मित करने में सफलता प्राप्त की। आयोजन में विवेक शर्मा, एकता पटेल, आरती सोलिया और दिलीप यादव सहित समस्त स्टाफ का विशेष योगदान रहा।

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