मध्यप्रदेश

मौत के मुहाने पर खड़ा कोयलांचल: SECL की संवेदनहीनता ने फूंकी हजारों जिंदगियों में दहशत, क्या किसी बड़े नरसंहार का इंतज़ार है?

 

अनू,पपुर/भालूमाड़ा(असलम बाबा)जिम्मेदारों की चुप्पी, जनता की बेबसी: अनूपपुर जिले के जमुना-कोतमा उपक्षेत्र से जो तस्वीरें और खबरें आ रही हैं, वे किसी भी संवेदनशील इंसान की रूह कंपा देने के लिए काफी हैं। गोविंदा कॉलोनी में स्थित SECL के डबल स्टोरी आवास आज सरकारी फाइल में भले ही ‘मकान’ हों, लेकिन असलियत में ये ‘कब्रगाह’ बन चुके हैं। 30 साल पुरानी ये इमारतें जर्जर होकर अब धराशायी होने की कगार पर हैं, लेकिन प्रबंधन है कि कुंभकर्णी नींद से जागने का नाम नहीं ले रहा।

खंडहर में तब्दील आशियाने, डर के साये में बचपन

हमारी पड़ताल में सामने आया कि इन मकानों की हालत इतनी खस्ता है कि दीवारों में पड़ी दरारें अब आर-पार दिखने लगी हैं। छतों का प्लास्टर गिरना रोज की बात हो गई है। सबसे डरावना मंजर बारिश के दिनों में होता है, जब ये छतें छलनी की तरह टपकती हैं और करंट फैलने का खतरा बना रहता है। यहाँ रहने वाले हजारों मजदूर और उनके परिवार हर पल एक अनचाहे हादसे की आहट सुनकर सहम जाते हैं।

प्रबंधन की तानाशाही: अग्रवाल लॉज कांड से भी नहीं सीखा सबक!

कोतमा क्षेत्र में कुछ समय पूर्व हुए ‘अग्रवाल लॉज’ हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। बावजूद इसके, SECL प्रबंधन की बेशर्मी देखिए कि उन्होंने इस जर्जर कॉलोनी को खाली कराने या इसके पुनरुद्धार की दिशा में एक कदम भी नहीं बढ़ाया। क्या प्रबंधन यह मान चुका है कि मजदूरों की जान की कोई कीमत नहीं है? क्या अधिकारियों को केवल कोयले के उत्पादन से मतलब है, इंसान के खून से नहीं?

“हम कई बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन साहब लोग एयरकंडीशनर कमरों में बैठकर हमारी मौत का तमाशा देख रहे हैं। अगर कल को कोई बिल्डिंग गिरती है, तो इसका गुनहगार कौन होगा?” — एक आक्रोशित स्थानीय निवासी

हमारी मांग: अब कार्रवाई कागजों पर नहीं, जमीन पर हो!

दैनिक प्रदेश का गौरव स्पष्ट शब्दों में प्रशासन और SECL महाप्रबंधक से सवाल करता है कि आखिर इन मासूमों की जान से खिलवाड़ क्यों? हमारी मांगें सीधी और दो-टूक हैं:

तत्काल ध्वस्तीकरण: उन सभी भवनों को तत्काल जमींदोज किया जाए जो रहने लायक नहीं बचे हैं।

सुरक्षित विस्थापन: यहाँ रह रहे परिवारों को सम्मानजनक और सुरक्षित वैकल्पिक आवास तुरंत उपलब्ध कराए जाएं।

एफआईआर की चेतावनी: यदि समय रहते इन इमारतों को खाली नहीं कराया गया और कोई अनहोनी हुई, तो संबंधित अधिकारियों पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए।

कलेक्टर और एसपी से अंतिम उम्मीद

क्षेत्र की जनता ने अब अपनी अंतिम उम्मीद जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक पर टिका दी है। नागरिकों का कहना है कि अगर प्रशासन ने हस्तक्षेप कर SECL को मजबूर नहीं किया, तो वे सड़कों पर उतरने और उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

संपादकीय टिप्पणी:

प्रबंधन को यह समझना होगा कि ‘कोयला’ निकालने वाले ये हाथ ही विकास की धुरी हैं। अगर इन्हीं हाथों के सिर से छत छीन ली जाएगी या उन्हें जर्जर मकानों में मरने के लिए छोड़ दिया जाएगा, तो यह आधुनिक भारत की सबसे बड़ी विडंबना होगी। जागिए प्रबंधन! इससे पहले कि बहुत देर हो जाए।

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