मध्यप्रदेश

पर्यावरण संरक्षण का नया अध्याय: शहडोल में इस वर्ष ‘गौकाष्ठ’ आधारित होलिका दहन, प्रशासन ने शुरू किया ‘ग्रीन होली’ अभियान

 

शहडोल | 01 मार्च 2026मध्य प्रदेश शासन, सामान्य प्रशासन विभाग मंत्रालय के निर्देशों के अनुपालन में, इस वर्ष शहडोल जिला गौरवशाली परंपराओं के साथ-साथ आधुनिक पर्यावरणीय चेतना का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करने जा रहा है। कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने घोषणा की है कि इस वर्ष जिले में होली का पर्व न केवल रंगों का उत्सव होगा, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और सशक्त सामाजिक संदेश का माध्यम भी बनेगा। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य वनों की अंधाधुंध कटाई को रोकना और गौ-शालाओं को आत्मनिर्भर बनाते हुए ‘गौकाष्ठ’ (गोबर से निर्मित लकड़ी) के उपयोग को जन-आंदोलन बनाना है।

कलेक्टर ने जिले की समस्त जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (CEO) तथा नगरीय निकायों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों के तहत, स्थानीय स्तर पर टोलियां बनाकर नागरिकों को लकड़ियों के स्थान पर गौकाष्ठ एवं उपलों से बनी होलिका जलाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। प्रशासन ने इस पहल की सफलता की निगरानी के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की है, जिसके अंतर्गत श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली समितियों और निकायों के फोटोग्राफ्स एवं वीडियो संकलित किए जाएंगे, ताकि भविष्य में इन्हें प्रेरणा के रूप में प्रस्तुत किया जा सके।

वनों को जीवनदान और गौ-वंश को सम्मान: लकड़ी मुक्त होलिका दहन की ओर बढ़ते कदम

शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार, पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए इस बार ‘होलिका दहन’ की पारंपरिक पद्धति में बड़ा बदलाव लाने का प्रयास किया जा रहा है। हर वर्ष होलिका दहन के नाम पर हजारों क्विंटल हरी-भरी लकड़ियों की आहुति दे दी जाती है, जिससे न केवल वन क्षेत्र कम हो रहा है, बल्कि वायु प्रदूषण में भी भारी वृद्धि होती है। इसके विकल्प के रूप में गौकाष्ठ एक सर्वोत्तम माध्यम बनकर उभरा है। गोबर से बनी ये लकड़ियाँ न केवल सुगमता से जलती हैं, बल्कि इनके जलने से उत्पन्न धुआं वातावरण को शुद्ध करने में सहायक माना जाता है।

प्रशासन ने जन-सहभागिता और विभिन्न सामाजिक संगठनों के माध्यम से गौ-शालाओं से गौकाष्ठ की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इससे न केवल पर्यावरण की रक्षा होगी, बल्कि स्थानीय गौ-शालाओं की आय में वृद्धि होगी, जिससे गौ-वंश के संरक्षण को भी बल मिलेगा।

प्राकृतिक रंगों और सद्भाव का संदेश:

केवल होलिका दहन ही नहीं, बल्कि धुलेंडी (रंगों की होली) के लिए भी प्रशासन ने विशेष गाइडलाइन जारी की है। जिला प्रशासन ने नागरिकों से विनम्र अपील की है कि:

हर्बल होली: रसायनों से युक्त पक्के रंगों का त्याग कर प्राकृतिक और हर्बल रंगों का उपयोग करें ताकि त्वचा और स्वास्थ्य सुरक्षित रहे।

जल संरक्षण: पानी की बर्बादी को रोकने के लिए ‘सूखी होली’ को प्राथमिकता दें।

जीव-दया: बेजुबान पशु-पक्षियों पर जबरन रंग न डालें और उनके प्रति संवेदनशीलता दिखाएं।

नशा मुक्ति और भाईचारा: नशे की हालत में हुड़दंग करने वालों पर पुलिस की पैनी नजर रहेगी। प्रशासन का लक्ष्य है कि जिले का हर नागरिक आपसी मतभेद भुलाकर भाईचारे और सद्भाव के साथ इस पर्व का आनंद ले।

प्रशासन की इस पहल से शहडोल जिला प्रदेश में पर्यावरण मित्र होली (Green Holi) के एक मॉडल के रूप में उभरने के लिए तैयार है। आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे इस ‘शुद्ध और सुरक्षित’ अभियान का हिस्सा बनें और अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर पर्यावरण छोड़ने का संकल्प लें।

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