मध्यप्रदेश

मजदूरों की मेहनत पर ‘कॉर्पोरेट प्रहार’: वेतन के लिए भटक रहे 80 से ज्यादा श्रमिक, RKTC इंफ्राटेक पर गंभीर आरोप

 

अमलाई/सोहागपुर।

सरकार जहां ‘श्रमेव जयते’ और श्रमिक सम्मान की बात करती है, वहीं औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों के अधिकारों पर लगातार प्रहार होते नजर आ रहे हैं। सोहागपुर क्षेत्र की अमलाई खुली खदान से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां ठेका कंपनी RKTC Infratech Ltd पर मजदूरों का दो माह का वेतन रोकने के गंभीर आरोप लगे हैं। कंपनी की इस कथित मनमानी से दर्जनों परिवार आर्थिक संकट के भंवर में फंस गए हैं और मजदूर न्याय के लिए अधिकारियों की चौखट पर भटकने को मजबूर हैं।

सिस्टम की आंखों के सामने मजदूरों का शोषण

मामला सोहागपुर क्षेत्र स्थित अमलाई ओपन कास्ट खदान से जुड़ा हुआ है, जो South Eastern Coalfields Limited (एसईसीएल) के अधीन संचालित होती है। यहां कार्यरत आरकेटीसी इंफ्राटेक के पूर्व कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि कंपनी ने नवंबर और दिसंबर 2025 का वेतन अब तक नहीं दिया है।

प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, पीड़ित कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर सब एरिया मैनेजर, अमलाई ओसीएम को लिखित शिकायत सौंपी है। शिकायत पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि मजदूर लगातार दो महीने से वेतन के लिए कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिल रहा है।

श्रमिकों की सूची में अक्षय कुमार यादव, अनिल कुमार सिंह, दीपांशु सुंडी सहित 80 से अधिक कर्मचारियों के नाम दर्ज बताए जा रहे हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि मामला किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि सामूहिक श्रमिक शोषण का है। सवाल उठता है कि क्या काम निकल जाने के बाद मजदूरों को उनके हाल पर छोड़ देना ही ठेका कंपनियों की कार्यशैली बन गई है?

अधिकारियों की खामोशी पर उठे गंभीर सवाल

कर्मचारियों ने अपनी शिकायत की प्रतिलिपि श्रम विभाग के अधिकारियों और एसईसीएल के उच्च प्रबंधन को भी भेजी है। जानकारी के अनुसार 11 फरवरी 2026 को शिकायत पर प्राप्ति मुहर तो लगा दी गई, लेकिन इसके बाद कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई।

मजदूरों का आरोप है कि वेतन नहीं मिलने के कारण उनके सामने रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया है। कई श्रमिकों ने बताया कि बच्चों की पढ़ाई, घर का राशन और दवाइयों का खर्च तक प्रभावित हो रहा है। कोयला खदानों में जोखिम भरा काम करने वाले मजदूर उम्मीद करते हैं कि महीने के अंत में उन्हें मेहनत का उचित पारिश्रमिक मिलेगा, लेकिन यहां स्थिति पूरी तरह विपरीत नजर आ रही है।

कंपनी और प्रशासन दोनों कठघरे में

इस पूरे प्रकरण ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

RKTC इंफ्राटेक लिमिटेड से सवाल

क्या कंपनी को मजदूरों का बकाया वेतन रोकने का अधिकार है? यदि श्रमिकों से पूरा काम लिया गया, तो भुगतान रोकने का औचित्य क्या है?

एसईसीएल प्रबंधन से सवाल

यदि आपकी निगरानी में कार्यरत ठेका कंपनियां श्रमिकों का शोषण करती हैं, तो क्या यह आपकी जवाबदेही नहीं बनती कि मजदूरों को उनका अधिकार दिलाया जाए?

श्रम विभाग और प्रशासन से सवाल

क्या श्रम कानून केवल फाइलों में सीमित रह गए हैं? मजदूरों को न्याय दिलाने के लिए जमीनी स्तर पर कार्रवाई कब होगी?

श्रमिकों ने दी आंदोलन की चेतावनी

पीड़ित कर्मचारियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बकाया वेतन का भुगतान नहीं किया गया, तो वे बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। श्रमिकों का कहना है कि अब वे केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होंगे और जरूरत पड़ी तो सामूहिक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

श्रमिकों के बीच बढ़ता असंतोष औद्योगिक क्षेत्र में तनाव की स्थिति पैदा कर सकता है। यदि समय रहते इस मुद्दे का समाधान नहीं हुआ, तो हालात बेकाबू होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

यह सिर्फ वेतन नहीं, श्रमिक सम्मान का सवाल

विशेषज्ञों का मानना है कि मजदूर किसी भी औद्योगिक व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। यदि उन्हें समय पर वेतन नहीं मिलता, तो यह केवल आर्थिक संकट नहीं बल्कि सामाजिक असुरक्षा की स्थिति पैदा करता है। श्रमिकों का सम्मान और उनका अधिकार सुनिश्चित करना किसी भी औद्योगिक संस्था और प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है।

निर्णायक कार्रवाई की जरूरत

यह मामला अब प्रशासन और कंपनी दोनों की साख से जुड़ चुका है। यदि जल्द ही मजदूरों का भुगतान नहीं किया गया, तो यह न केवल श्रम कानूनों की विफलता मानी जाएगी, बल्कि औद्योगिक क्षेत्र में अव्यवस्था और असंतोष को भी जन्म दे सकती है।

अब मजदूरों की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो श्रमिकों का उबाल किसी बड़े औद्योगिक विवाद का रूप ले सकता है।

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