‘इण्डियाज इन्टरनेशनल मूवमेंट टू यूनाईट नेशन’ में राज्यपाल ने सम्बोधित किया

जयपुर, 17 अक्टूबर। राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने कहा कि शिक्षा को विवेक, समझदारी और ज्ञान से जोड़ने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि परीक्षा में उत्तीर्ण होने का अर्थ जीवन में सफल होना नहीं है। जीवन की सफलता बौद्धिक क्षमताओं के विकास से होती है। उन्होंने कहा कि कर्तव्य की भावना का विकास हर व्यक्ति में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस भावना से ही जवाबदेही बढ़ेगी।
राज्यपाल श्री बागडे शनिवार को एक निजी विश्वविद्यालय में ‘इण्डियाज इन्टरनेशनल मूवमेंट टू यूनाईट नेशन’ के अंतर्गत ज़ेन जेड और ज़ेन अल्फा द्वारा शिक्षा और समाधान विषयक संवाद में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्राथमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण पाया है। इसमें बहुत ध्यान देने की जरूरत है। बच्चों को प्रतिभाशाली बनाना है तो सामान्य ज्ञान से विद्यार्थी जुड़े। इसी से बच्चे बौद्धिक रूप में विकसित हो सकेंगे।
राज्यपाल ने कहा कि युवा उच्च शिक्षा के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अपने आपको तैयार करें। उन्होंने कहा कि महिला पुरुष में अब भेद नहीं रह गया है। महिलाएं अब हर क्षेत्र में आगे आ रही हैं। उन्होंने कहा कि आज लड़कियां लड़कों से शिक्षा में अधिक अच्छा प्रदर्शन कर रहीं है। उन्होंने कमला भागवत सोहनी का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें मुंबई विश्वविद्यालय में प्रवेश नहीं दिया गया। पर उसने हिम्मत नहीं हारी। अपने प्रयासों से वह पहली भारतीय महिला हुई जिसने भारत में सबसे पहले पीएचडी की। उन्होंने खाद्य पदार्थों में मौजूद प्रोटीनों पर काम किया, और अनुसंधान में सेल्यूलर एंजाइम साइटोक्रोम सी की खोज की। उन्होंने कहा कि महिलाएं आत्मबल मजबूत रखे। इसी से वे जीवन में निरंतर आगे बढ़ सकेंगी।
श्री बागडे ने कहा कि पेपर लीक की स्थितियां नहीं हो, इसके लिए कानूनी कार्यवाही ही पर्याप्त नहीं है। जीवन में नैतिकता, ईमानदारी, प्रामाणिकता होगी तो पेपर लीक नहीं होंगे। यह सब जीवनगत संस्कार है। इनसे जुड़ी शिक्षा से युवाओं को जुड़ना चाहिए। युवा पाठ्य पुस्तकें ही नहीं पढ़े बल्कि सामाजिक सरकारों से जुड़े ज्ञान के लिए भी प्रयासरत रहें। उन्होंने कहा कि ईमानदारी, नैतिकता हर व्यक्ति के मन में होना जरूरी है।
राज्यपाल ने कहा कि भारत के लोगों के पास नैतिकता आरम्भ से रही है। परन्तु अंग्रेजों के आने के बाद जो शिक्षा पद्धति लॉर्ड मैकाले ने प्रारम्भ की उससे जीवन में मूल्य गौण होते चले गये।
श्री बागडे ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाएं ही नहीं उनका संरक्षण भी करें। अधिक गर्मी से बचाव का एक मात्र उपाय पेड़ ही हैं। उन्होंने कहा कि भले ही सौ एकड़ की जगह दस एकड़ में ही पेड़ लगाएं पर जो पेड़ लगाएं वह बचे रहे, इसका प्रयास जरूर करें। उन्होंने एक पेड़ मां के नाम लगाने के लिए सभी बच्चों को आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने भावी पीढ़ियों के लिए हर बच्चे को पेड़ लगाने और उनकी सार संभाल करने की आवश्यकता जताई।




