महिला किसान दिवस पर आदिवासी महिलाओं को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण

इनारावरण (SHABD) : अंतरराष्ट्रीय महिला किसान दिवस के अवसर पर कटोरिया थाना क्षेत्र के इनारावरण में आदिवासी महिला किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रोत्साहन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें सैकड़ों महिला किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान उन्हें प्राकृतिक और जैविक खेती की तकनीकों की जानकारी दी गई। साथ ही, कृषि आधारित गतिविधियों के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने और अपनी आजीविका को मजबूत करने के उपाय बताए गए।
कार्यक्रम में कृषि विशेषज्ञों ने महिलाओं को प्राकृतिक खेती के महत्व से अवगत कराया। उन्हें बताया गया कि रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के लिए जैविक खाद और प्राकृतिक कृषि आदानों का उपयोग किया जा सकता है। इससे खेती की लागत कम करने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है।
कृषि सहायक निदेशक (रसायन) डॉ. श्रीकांत ने बताया कि दूरदराज के क्षेत्रों में महिला किसानों को प्रशिक्षित कर प्राकृतिक खेती से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं केंचुआ खाद, जीवामृत, घन जीवामृत और पंचगव्य खाद जैसे कृषि आदानों को तैयार कर आजीविका के अवसर विकसित कर रही हैं। उनके अनुसार, इन गतिविधियों से महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिल रही है।
डॉ. श्रीकांत ने यह भी बताया कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों के लिए कृषि विभाग को नेशनल एक्सीलेंस अवार्ड और ग्लोबल एक्सीलेंस अवार्ड से सम्मानित किए जाने की जानकारी है। इन पुरस्कारों के नाम और संबंधित वर्ष की आधिकारिक पुष्टि की जानी चाहिए।
कार्यक्रम में मुनिया देवी, प्रेमलता देवी, सुकमुनिया टुडू, बागीश और पश्चिम बंगाल से आई अत्री सहित अन्य प्रतिभागियों ने महिला किसानों को प्रोत्साहित किया। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए महिलाओं को सामूहिक प्रयास, प्रशिक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग के माध्यम से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम को रोचक और सहभागितापूर्ण बनाने के लिए सामूहिक रंगोली, गायन और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया। इन गतिविधियों में महिला किसानों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने बताया कि पहले उन्हें खेती और आजीविका से जुड़ी कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, लेकिन प्रशिक्षण और नई तकनीकों की जानकारी मिलने से उनके काम में सहूलियत आई है।
कुल मिलाकर, महिला किसान दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम आदिवासी महिलाओं को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करने, उनके अनुभवों को साझा करने और कृषि के माध्यम से आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक पहल रहा।




