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योगी कैबिनेट के चार बड़े फैसले: जेवर एयरपोर्ट का नाम नरेंद्र मोदी के नाम पर रखने का प्रस्ताव, 18 शहरों को मिलेंगी 1,725 एसी इलेक्ट्रिक बसें

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में विकास, परिवहन, पर्यटन और महिला एवं बाल कल्याण से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। कैबिनेट ने जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने पर अभिनंदन प्रस्ताव पारित किया गया। बैठक में प्रदेश के 18 शहरों में 1,725 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें चलाने, लखनऊ के नौसेना शौर्य संग्रहालय का विस्तार करने और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को हर साल एक अतिरिक्त साड़ी उपलब्ध कराने का निर्णय भी लिया गया।

सरकार के इन फैसलों में आधुनिक बुनियादी ढांचे के विकास से लेकर शहरी परिवहन को बेहतर बनाने, पर्यटन को बढ़ावा देने और आंगनबाड़ी कर्मचारियों को अतिरिक्त सुविधा उपलब्ध कराने तक कई महत्वपूर्ण पहल शामिल हैं।

जेवर एयरपोर्ट का नाम ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ करने का प्रस्ताव

योगी कैबिनेट ने जेवर में विकसित हो रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदलकर ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ करने का प्रस्ताव पारित किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों, उत्तर प्रदेश के विकास में उनके योगदान और उनके मार्गदर्शन के प्रति प्रदेश सरकार की कृतज्ञता का प्रतीक बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर को सरकार के मुखिया के रूप में सार्वजनिक सेवा के 25 वर्ष पूरे किए। उनकी यह यात्रा सेवा, समर्पण और राष्ट्र प्रथम की भावना से जुड़ी रही है। उन्होंने इसे केवल सत्ता और शासन की यात्रा नहीं, बल्कि जनसेवा से जनकल्याण और जनभागीदारी से जनविश्वास तक पहुंचने वाली यात्रा बताया।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, जेवर एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश को मिली महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है। आने वाले समय में यह प्रदेश की अर्थव्यवस्था, उद्योग, पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय संपर्क व्यवस्था को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। एयरपोर्ट के विकास से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों, निवेश और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

कैबिनेट ने प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने पर अभिनंदन प्रस्ताव भी पारित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री के नेतृत्व और मार्गदर्शन में ‘विकसित उत्तर प्रदेश, विकसित भारत-2047’ के संकल्प को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

काशी से जेवर तक उत्तर प्रदेश के विकास पर जोर

प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में हुए विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2017 के बाद प्रदेश में बुनियादी ढांचे, कानून-व्यवस्था, निवेश और सार्वजनिक सुविधाओं को विकास का आधार बनाया गया है।

उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेसवे, मेट्रो और नमो भारत जैसी परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि प्रदेश में सड़क और सार्वजनिक परिवहन के नेटवर्क का विस्तार हुआ है। मुख्यमंत्री के अनुसार, करीब 2,483 किलोमीटर लंबे 42 राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ी परियोजनाओं पर लगभग 60 हजार करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाओं से आवागमन को गति मिली है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत परियोजना को भी आधुनिक सार्वजनिक परिवहन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जेवर एयरपोर्ट इस बदलती कनेक्टिविटी का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है। इससे प्रदेश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर संपर्क सुविधा मिलने की उम्मीद है।

18 शहरों में चलेंगी 1,725 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें

कैबिनेट बैठक में शहरी परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 18 शहरों में 1,725 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों का संचालन करने का निर्णय लिया गया। ये बसें ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट यानी जीसीसी मॉडल पर चलाई जाएंगी। अनुबंध की अवधि व्यावसायिक संचालन शुरू होने की तारीख से 12 वर्ष निर्धारित की गई है।

योजना में आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, बरेली, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मथुरा-वृंदावन, मेरठ, मुरादाबाद, प्रयागराज, शाहजहांपुर, सहारनपुर, वाराणसी और नोएडा को शामिल किया गया है। नोएडा के अंतर्गत जेवर क्षेत्र भी शामिल रहेगा।

लखनऊ और कानपुर को सबसे ज्यादा बसें

प्रस्तावित योजना के अनुसार, लखनऊ और कानपुर में 300-300 इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी। वाराणसी को 250 और गोरखपुर को 150 बसें मिलेंगी। अन्य शहरों के लिए बसों की संख्या इस प्रकार निर्धारित की गई है—

आगरा में 100 बसें।

मथुरा-वृंदावन में 50 बसें।

अलीगढ़ और फिरोजाबाद में 25-25 बसें।

गाजियाबाद और मेरठ में 100-100 बसें।

शाहजहांपुर, बरेली, मुरादाबाद और सहारनपुर में 25-25 बसें।

नोएडा, जेवर सहित, में 100 बसें।

अयोध्या और प्रयागराज में 50-50 बसें।

झांसी में 25 बसें।

बसों की खरीद पर मिलेगा 35 से 40 लाख रुपये तक अनुदान

योजना के तहत 12 मीटर लंबी प्रत्येक इलेक्ट्रिक बस की खरीद पर 40 लाख रुपये और 9 मीटर लंबी प्रत्येक बस पर 35 लाख रुपये का अनुदान देने का निर्णय लिया गया है।

जीसीसी मॉडल के अंतर्गत निजी ऑपरेटर बसों की खरीद, चार्जिंग स्टेशन के लिए आवश्यक उपकरणों की व्यवस्था, चालकों एवं तकनीकी कर्मचारियों की नियुक्ति तथा बसों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेंगे। निर्धारित प्रदर्शन मानकों के आधार पर उन्हें संचालन एवं रखरखाव शुल्क दिया जाएगा, जबकि यात्रियों से लिए जाने वाले किराये का निर्धारण सरकार करेगी।

बसों के संचालन के लिए डिपो निर्माण हेतु संबंधित नगर निगमों और नोएडा प्राधिकरण की ओर से आवश्यकतानुसार भूमि निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।

सरकार का मानना है कि निजी निवेश और प्रतिस्पर्धा के माध्यम से सार्वजनिक परिवहन सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से शहरी क्षेत्रों में आधुनिक परिवहन विकल्प उपलब्ध होंगे। साथ ही, उत्तर प्रदेश में निर्मित बसों की खरीद को वरीयता देने से स्थानीय उद्योग और रोजगार को प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।

लखनऊ में नौसेना शौर्य संग्रहालय का होगा विस्तार

राजधानी लखनऊ में विकसित किए जा रहे नौसेना शौर्य संग्रहालय को और आकर्षक बनाने की तैयारी है। कैबिनेट ने परियोजना के तीसरे चरण में लगभग 6.8 एकड़ भूमि पर वाटर बॉडी विकसित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण संबंधित भूमि पर्यटन विभाग को एक लाख रुपये की टोकन मनी पर उपलब्ध कराएगा।

परियोजना के तहत नौसेना के जहाजों की प्रतिकृतियां, बोटिंग की सुविधा, लाइट एंड साउंड शो और जलीय जीवन से जुड़ी प्रदर्शनियां विकसित करने की योजना है। इससे संग्रहालय को ऐसा पर्यटन केंद्र बनाने की तैयारी है, जहां लोग भारतीय नौसेना के इतिहास, समुद्री तकनीक और देश की रक्षा क्षमताओं की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

डिजिटल गैलरी और आधुनिक तकनीक होंगे प्रमुख आकर्षण

संग्रहालय में क्यूरेशन एंड एक्सपीरियंस सेंटर विकसित किया जाएगा। यहां डिजिटल गैलरी, इंटरैक्टिव प्रदर्शनियां, ऑडियो-विजुअल प्रस्तुतियां और सिमुलेशन के माध्यम से भारतीय समुद्री विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा।

इस केंद्र में प्राचीन समुद्री व्यापार से लेकर आधुनिक नौसैनिक अभियानों और स्वदेशी रक्षा तकनीक तक की जानकारी उपलब्ध कराने की योजना है। भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा, आपदा राहत और बचाव अभियानों में भूमिका को भी प्रदर्शित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त एक्वेरियम विकसित करने की योजना है, जिससे विद्यार्थियों और शोध में रुचि रखने वाले युवाओं को समुद्री जीवन के बारे में जानकारी मिल सकेगी।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में ऐसे पर्यटन स्थलों का विकास किया जा रहा है, जो लोगों में जिज्ञासा पैदा करने के साथ युवाओं को देश की राष्ट्रीय विरासत से जोड़ें।

69.10 करोड़ रुपये की मंजूरी, 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य

संग्रहालय भवन, नौसेना शौर्य वाटिका और क्यूरेशन से संबंधित कार्यों के लिए अब तक लगभग 69.10 करोड़ रुपये की मंजूरी दी जा चुकी है। तीन चरणों में विकसित की जा रही इस परियोजना को वर्ष 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

परिसर में प्रवेश के लिए टिकट की व्यवस्था होगी। विद्यार्थियों और स्कूली बच्चों को रियायती दर पर प्रवेश देने की योजना है। इससे शैक्षणिक भ्रमण को बढ़ावा मिलने और विद्यार्थियों को इतिहास, विज्ञान, तकनीक तथा राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित विषयों को करीब से समझने का अवसर मिलने की उम्मीद है।

नौसेना शौर्य वाटिका के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी लखनऊ विकास प्राधिकरण संभालेगा। क्यूरेशन एंड एक्सपीरियंस सेंटर और वाटर बॉडी का निर्माण पूरा होने के बाद उनके संचालन की जिम्मेदारी भी इसी व्यवस्था के तहत निभाई जाएगी।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को हर साल मिलेगी एक अतिरिक्त साड़ी

योगी कैबिनेट ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया। प्रदेश में कार्यरत इन कर्मचारियों को अब विभागीय कार्यों के बेहतर संपादन और निर्धारित वेशभूषा में काम करने के लिए हर साल एक अतिरिक्त साड़ी उपलब्ध कराई जाएगी।

इस फैसले से प्रदेश के 3,80,290 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को लाभ मिलने का अनुमान है। राज्य सरकार इस पर लगभग 19.02 करोड़ रुपये खर्च करेगी।

वर्तमान व्यवस्था के तहत केंद्र प्रायोजित योजना में केंद्र और राज्य के 60:40 अनुपात के अनुसार प्रतिवर्ष दो साड़ियां उपलब्ध कराई जाती हैं। अब इसके अतिरिक्त एक साड़ी और दी जाएगी।

बच्चों और महिलाओं के पोषण में महत्वपूर्ण भूमिका

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में बच्चों और महिलाओं तक पोषण एवं अन्य निर्धारित सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनके माध्यम से छह वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं और 14 से 18 वर्ष की किशोरी बालिकाओं के लिए निर्धारित सेवाएं संचालित की जाती हैं।

प्रदेश में 1,90,145 आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए 1,90,145 कार्यकर्ताओं और इतनी ही संख्या में सहायिकाओं के पद स्वीकृत हैं। अतिरिक्त साड़ी देने के फैसले से इन कर्मचारियों को कार्यस्थल पर निर्धारित वेशभूषा बनाए रखने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

किसानों, गरीबों और युवाओं के लिए योजनाओं का भी किया उल्लेख

कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों का उल्लेख करते हुए उत्तर प्रदेश में संचालित विभिन्न योजनाओं और विकास कार्यों की जानकारी भी दी।

मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत प्रदेश के तीन करोड़ से अधिक किसानों के खातों में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि भेजी जा चुकी है। गन्ना किसानों को 3.30 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किए जाने और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 65 लाख से अधिक गरीब परिवारों को आवास मिलने की जानकारी भी दी गई।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत प्रदेश में लगभग 15 करोड़ लोगों को मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। जल जीवन मिशन के तहत 2.46 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल से जल का कनेक्शन दिया जा चुका है।

स्वास्थ्य क्षेत्र का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने आयुष्मान भारत योजना के तहत बनाए गए कार्डों और मुफ्त उपचार का लाभ पाने वाले मरीजों की जानकारी दी। वहीं, युवाओं के लिए सरकारी नियुक्तियों, निजी क्षेत्र में रोजगार और कौशल विकास प्रशिक्षण से जुड़े आंकड़े भी प्रस्तुत किए।

सांस्कृतिक विरासत के संबंध में मुख्यमंत्री ने अयोध्या में राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम और प्रयागराज महाकुंभ सहित विभिन्न परियोजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे के विकास के साथ प्रदेश की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

 

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