खुशियों के ओटले ने 100 बच्चों को बांटे कपड़े के झोले, दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

ब्यावरा। शहर की सामाजिक संस्था खुशियों का ओटला द्वारा रविवार को 100 बच्चों को कपड़े से बने झोले निःशुल्क वितरित किए गए। संस्था के संचालक डॉ सुरजीत सिंह ने बताया कि ये झोले ओटले पर आने वाले पुराने कपड़ों को रीसायकल कर तैयार किए गए हैं। इसका उद्देश्य सिंगल यूज़ प्लास्टिक और पॉलिथीन के उपयोग को कम कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाना है।
डॉ. सिंह ने बताया कि खुशियों का ओटला अब तक 10 हजार से अधिक कपड़े के झोले तैयार कर निःशुल्क वितरित कर चुका है। बाजार में स्टॉल लगाकर महिलाओं, बच्चों एवं जरूरतमंद लोगों को ये झोले दिए जाते हैं, ताकि वे बाजार जाते समय कपड़े का झोला साथ लेकर जाएं और पॉलिथीन का उपयोग न करें। सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर्यावरण में लंबे समय तक बनी रहती है और मिट्टी, जल एवं पशुओं के लिए नुकसानदायक है। अक्सर पॉलिथीन खाने से पशुओं, विशेषकर गायों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव पड़ता है। संस्था ने लोगों से अपील की कि “पॉलिथीन छोड़ें, कपड़े का झोला अपनाएं और पर्यावरण बचाएं। खुशियों का ओटला निरंतर समाजसेवा के कार्यों में सक्रिय है। संस्था द्वारा जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े एवं अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने के साथ ‘खुशियों की रोटी’ के माध्यम से जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराया जाता है। कार्यक्रम में ओटले के सचिव डॉ. रवि साहू, शिक्षिका सोनम खान, कनक विश्वकर्मा, काजल वाल्मीकि पायल वाल्मीकि नेहा सहित बड़ी संख्या में बच्चे एवं महिलाएं उपस्थित रहे।




