धोखाधड़ी और दबंगई: धनपुरी में श्रमिक के स्वाभिमान से खिलवाड़, ‘मरना है तो मर जा’ कहने वाले कंपनी प्रबंधन पर कब गिरेगी गाज?

धनपुरी (शहडोल)। जिले के धनपुरी थाना क्षेत्र में एक बार फिर पूंजीपतियों के रसूख और गरीब श्रमिकों के शोषण का शर्मनाक मामला सामने आया है। ओपीएम (OPM) और आरकेटीसी (RKTC) जैसी बड़ी कंपनियों में काम करने वाले एक श्रमिक को न केवल काम से बाहर का रास्ता दिखाया गया, बल्कि जब उसने अपनी व्यथा सुनाई, तो प्रबंधन ने संवेदनहीनता की सारी हदें पार करते हुए उसे ‘मर जाने’ तक सलाह दे डाली।क्या है पूरा मामला?शिकायतकर्ता कैलाश यादव (निवासी- खमरिया, अनूपपुर) ने धनपुरी थाना प्रभारी को लिखित शिकायत सौंपते हुए न्याय की गुहार लगाई है। कैलाश के अनुसार, वह पिछले 3 महीनों से काम की तलाश में भटक रहा था। आज जब वह अपने काम के सिलसिले में कंपनी परिसर पहुँचा, तो वहाँ मौजूद राज तिवारी और श्रीकांत दाहिया ने उसके साथ गाली-गलौज शुरू कर दी।
संवेदनहीनता की पराकाष्ठा: “तू कुछ भी कर ले, हम देख लेंगे”
पीड़ित का आरोप है कि जब उसने अपनी आर्थिक स्थिति और मजबूरी का हवाला देते हुए यहाँ तक कह दिया कि “काम नहीं मिला तो मैं आत्महत्या कर लूँगा”, तो प्रबंधन के नुमाइंदों का दिल पसीजने के बजाय और कठोर हो गया। राज तिवारी और श्रीकांत दाहिया ने कथित तौर पर अहंकार में चूर होकर कहा— “तू कुछ भी कर ले, हम देख लेंगे।” इतना ही नहीं, पीड़ित के साथ अभद्रता करते हुए उसे दोबारा कंपनी परिसर में न दिखने की धमकी देकर भगा दिया गया।
बड़ा सवाल: कानून का खौफ या रसूख की ढाल?
एक तरफ प्रशासन श्रमिकों के हितों की रक्षा के बड़े-बड़े दावे करता है, वहीं दूसरी ओर सरेआम एक गरीब को आत्महत्या के लिए उकसाने वाली भाषा का प्रयोग किया जा रहा है।
क्या कंपनी के अधिकारी कानून से ऊपर हैं?
क्या किसी श्रमिक को डराना-धमकाना और उसे मौत के मुंह में ढकेलना अब आम बात हो गई है?
पीड़ित कैलाश यादव ने पुलिस से उचित कार्रवाई की मांग की है। अब देखना यह होगा कि धनपुरी पुलिस इन रसूखदारों पर शिकंजा कसती है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।



