राजगढ़ जिले की 22 शासकीय उचित मूल्य दुकानों के विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस
निरीक्षण, स्टॉक सत्यापन और ऑनलाइन समीक्षा में खुली लापरवाही; तीन दिन में जवाब तलब प्रशासन का संदेश—पीडीएस में गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं, गरीबों का हक हर हाल में मिलेगा

राजगढ़, 30 जनवरी 2026। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के जरिए गरीब और पात्र हितग्राहियों तक खाद्यान्न पहुंचाने की व्यवस्था में सामने आई लापरवाहियों ने जिला प्रशासन को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। जिले की 22 शासकीय उचित मूल्य दुकानों के विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। यह कार्रवाई ई-केवाईसी लंबित रखने, दुकानों को नियमित नहीं खोलने, खाद्यान्न वितरण प्रभावित करने और शासन के निर्देशों की अनदेखी जैसे मामलों में की गई है।
जिला आपूर्ति विभाग की समीक्षा में यह स्पष्ट हुआ कि कई उचित मूल्य दुकान संचालक अपने दायित्वों के प्रति गंभीर नहीं हैं। पात्र और अपात्र सदस्यों की ई-केवाईसी समय पर पूरी नहीं कराई गई, जिससे वास्तविक हितग्राहियों को राशन वितरण में बाधा आई। वहीं कई दुकानों के महीने में सीमित दिनों तक ही खुलने से ग्रामीणों को राशन के लिए बार-बार चक्कर लगाने पड़े।
जिला आपूर्ति अधिकारी के अनुसार यह कार्रवाई 27 एवं 28 जनवरी को आयोजित ऑनलाइन समीक्षा बैठकों, मैदानी निरीक्षण और 29 जनवरी 2026 की स्टॉक स्थिति के विश्लेषण के आधार पर की गई है। जिन दुकानों पर खाद्यान्न शेष मिला, उसे समय पर वितरण नहीं होने का संकेत माना गया।
कैसे खुली अनियमितताओं की परतें
जनवरी माह में जिलेभर की पीडीएस दुकानों की समीक्षा का अभियान चलाया गया। विभाग ने ई-केवाईसी की प्रगति, दुकान संचालन के दिनों और खाद्यान्न वितरण की स्थिति का तुलनात्मक आकलन किया। इसी दौरान कई दुकानों की स्थिति संदिग्ध पाई गई।
ऑनलाइन समीक्षा बैठक में कुछ विक्रेताओं की अनुपस्थिति ने विभाग का ध्यान खींचा। जब स्टॉक मिलान और वितरण आंकड़ों की जांच की गई तो पता चला कि कई दुकानों पर खाद्यान्न शेष है, जबकि हितग्राहियों की शिकायतें राशन नहीं मिलने की थीं। इससे स्पष्ट हुआ कि या तो दुकानें नियमित नहीं खुल रहीं या वितरण में गंभीर लापरवाही हो रही है।
ई-केवाईसी में लापरवाही बनी बड़ी वजह
सरकार ने पीडीएस व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए ई-केवाईसी अनिवार्य किया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राशन का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचे। लेकिन समीक्षा में सामने आया कि कई विक्रेताओं ने इस कार्य को प्राथमिकता नहीं दी।
ई-केवाईसी लंबित रहने से कई हितग्राही राशन लेने से वंचित रह जाते हैं। विभाग का मानना है कि यह सिर्फ तकनीकी कमी नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही भी है।
कम दिन खुलीं दुकानें, बढ़ी परेशानी
जांच में सामने आया कि कई दुकानों ने पूरे महीने निर्धारित दिनों तक संचालन नहीं किया। कुछ दुकानों ने तो आधे महीने से भी कम दिन काम किया। इससे ग्रामीणों को राशन के लिए बार-बार जाना पड़ा।
सबसे चौंकाने वाला मामला बावड़ीपुरा का रहा, जहां दुकान पूरे महीने में मात्र 3 दिन खुली। पाडल्याखेड़ी में दुकान सिर्फ 8 दिन खुली और वहां 56 प्रतिशत खाद्यान्न शेष पाया गया।
अधिकारियों का कहना है कि यदि वितरण नियमित होता तो इतना स्टॉक बचा नहीं रहता।
जिन दुकानों पर हुई कार्रवाई
कार्रवाई की जद में आई 22 शासकीय उचित मूल्य दुकानें और उनके विक्रेता इस प्रकार हैं—
बखेड (कोड 3203004) — भवरलाल
गोलाखेड़ा (3203082) — ओमप्रकाश
खैरासी (3203072) — श्यामसिंह
पाडल्याखेड़ी (3203032) — देवेन्द्र नागर
पाटनकलां (3203064) — प्रेमसिंह भालोट
मांडाखेड़ा (3203105) — प्रियंका शर्मा
प्रेमपुरा (3203096) — चैनसिंह
सनखेड़ी (3203124) — मधुबाई
धनवास (3203087) — दिनेश तंवर
हिरनखेड़ा (3203125) — पूजा
देहरीकराड़ (3203101) — निर्मला
महाबल (3203120) — पूजा
कंवरपूरा (3203081) — बालूसिंह तंवर
लाख्या (3203076) — जसवंत सौंधिया
हिनोती (3203085) — मांगीलाल
कुण्डीबे (3203073) — प्रताप सिंह पंवार
जलालपुरा (3203015) — मोहन सिंह
बावड़ीपुरा (3203098) — विमल तंवर
फूलखेड़ी (3203038) — रामकरण परमार
कोडियाजरगर (3203104) — भावना
लिम्बोदा (3203026) — चंदर सिंह दांगी
अभयपुर (3203094) — गायत्री तंवर
स्टॉक शेष ने खड़े किए सवाल
29 जनवरी की स्टॉक स्थिति में कई दुकानों पर खाद्यान्न शेष मिला। कुछ प्रमुख उदाहरण—
पाडल्याखेड़ी — 56%
गोलाखेड़ा — 20%
धनवास — 16%
बावड़ीपुरा — 16%
फूलखेड़ी — 12%
कुण्डीबे — 10%
अधिकारियों का कहना है कि यह स्थिति सामान्य नहीं मानी जा सकती। जब हितग्राहियों को राशन चाहिए और स्टॉक बचा है, तो यह वितरण में कमी का संकेत है।
समीक्षा बैठक में अनुपस्थिति भी बनी वजह
27 और 28 जनवरी की ऑनलाइन समीक्षा बैठकों में कुछ विक्रेता शामिल नहीं हुए। विभाग इसे गंभीरता से ले रहा है। अधिकारियों का मानना है कि यदि विक्रेता जवाबदेह होते तो बैठक में उपस्थित रहते और समस्याओं पर चर्चा करते।
किन नियमों का उल्लंघन
जिला आपूर्ति अधिकारी ने स्पष्ट किया कि संबंधित विक्रेताओं के विरुद्ध कार्रवाई मध्यप्रदेश सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश 2015 की कंडिका 10(4), 18 तथा प्राधिकार पत्र की शर्त क्रमांक 29 के तहत की गई है।
इन प्रावधानों के अनुसार उचित मूल्य दुकान संचालकों को नियमित संचालन, पारदर्शी वितरण और रिकॉर्ड संधारण अनिवार्य रूप से करना होता है।
तीन दिन में जवाब तलब
सभी संबंधित विक्रेताओं को तीन दिवस के भीतर उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं। यदि तय समय सीमा में जवाब नहीं मिला या जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो वितरण कार्य से पृथक करने की कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों ने साफ किया है कि ऐसी स्थिति में पूरी जिम्मेदारी संबंधित विक्रेता की होगी।
हितग्राहियों की परेशानियां भी आईं सामने
ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई दुकानों पर समय पर राशन नहीं मिल रहा। हितग्राहियों को कई-कई बार दुकान के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कभी मशीन खराब बताई जाती है, तो कभी स्टॉक खत्म होने का हवाला दिया जाता है।
लेकिन स्टॉक रिपोर्ट में राशन शेष मिलना इन दावों पर सवाल खड़े करता है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि कई जगह वितरण पारदर्शी तरीके से नहीं हो रहा।

