मध्यप्रदेश

खिलेगा व्यक्तित्व, नशा मुक्त होगा भविष्य: धनपुरी की माटी के लाल जिला न्यायाधीश हिदायत उल्ला खान का युवाओं को मंत्र

अखिल भारतीय गोल्ड कप फुटबॉल: लघु भारत की झलक बना धनपुरी का सुभाष स्टेडियम, देश भर के खिलाड़ियों का बढ़ा उत्साह

मोहम्मद असलम बाबा
​धनपुरी (शहडोल)। ‘खिलेगा व्यक्तित्व, नशा मुक्त होगा भविष्य’— इसी सकारात्मक संकल्प के साथ धनपुरी की पावन धरा पर फुटबॉल का महाकुंभ अपनी पूरी भव्यता के साथ जारी है। नगर पालिका परिषद धनपुरी द्वारा सुभाष स्टेडियम नंबर-3 में आयोजित ‘अखिल भारतीय गोल्ड कप फुटबॉल टूर्नामेंट’ ने आज न केवल शहडोल संभाग, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में खेल जगत का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस गौरवशाली आयोजन के अवसर पर देपालपुर (इंदौर) के माननीय जिला न्यायाधीश और धनपुरी के गौरव श्री हिदायत उल्ला खान ने सात समंदर पार तक गूँजने वाला एक प्रेरणादायक संदेश साझा किया है।
​देशभर के खिलाड़ियों का संगम: ‘मिनी इंडिया’ बना स्टेडियम
​इस टूर्नामेंट की सबसे बड़ी विशेषता इसकी व्यापकता है। देश के सुदूर क्षेत्रों— केरल, बंगाल, पंजाब, और पूर्वोत्तर भारत के राज्यों से आए फुटबॉल खिलाड़ियों ने अपनी खेल प्रतिभा से धनपुरी की मिट्टी को महका दिया है। माननीय जिला न्यायाधीश श्री खान ने अपने संदेश में विशेष रूप से इन बाहरी राज्यों से आए खिलाड़ियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “यह केवल एक खेल मैदान नहीं, बल्कि एक ऐसा मंच है जहाँ भारत की एकता और विविधता के दर्शन हो रहे हैं। देश के कोने-कोने से आए हमारे ये अतिथि खिलाड़ी धनपुरी के युवाओं के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं।”
​नशा छोड़ें, मैदान चुनें: न्यायाधीश की युवाओं से भावुक अपील
​अपनी जन्मस्थली के प्रति अगाध प्रेम व्यक्त करते हुए श्री खान ने कहा कि भले ही वे न्यायिक दायित्वों के कारण दूर हैं, लेकिन उनके हृदय की धड़कनें धनपुरी के इसी मैदान में बसती हैं। उन्होंने युवाओं को नशे के अंधकार से बचने की चेतावनी देते हुए कहा कि असली ‘हाई’ नशे के धुएँ में नहीं, बल्कि गोल दागने की खुशी और मैदान की धूल में है।
​उन्होंने खिलाड़ियों और युवाओं के समक्ष तीन सशक्त जीवन मंत्र रखे:
​मैदान चुनिए, नशा नहीं।
​मेहनत चुनिए, भटकाव नहीं।
​चरित्र चुनिए, अपराध नहीं।
​सामाजिक परिवर्तन का वाहक बना आयोजन
​जिला न्यायाधीश ने आयोजन समिति और नगर पालिका परिषद की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन ही एक अनुशासित और सशक्त समाज का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उनके अनुसार, खेल अनुशासन सिखाता है और अनुशासन से ही अपराध मुक्त समाज की कल्पना साकार हो सकती है।
​सेमीफाइनल की दहलीज पर खड़े इस टूर्नामेंट ने यह साबित कर दिया है कि खेल के माध्यम से न केवल प्रतिभाएं निखरती हैं, बल्कि ‘नशा मुक्त भविष्य’ का सपना भी सच होता है। न्यायाधीश महोदय के इस संदेश ने न केवल खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाया है, बल्कि पूरे नगर में खेलों के प्रति एक नई चेतना जागृत कर दी है।

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