मध्यप्रदेश

“आदमी ने नाप डाली चाँद तक की दूरियाँ, आदमी तक पहुँच पाना पर अभी भी शेष है”

जिला न्यायाधीश हिदायत उल्ला ख़ान की नज़्म ने मुशायरे को बना दिया संवेदना का उत्सव

जिला न्यायाधीश हिदायत उल्ला ख़ान की नज़्म ने मुशायरे को बना दिया संवेदना का उत्सव

इंदौर – जब विज्ञान चाँद तक की दूरी नाप चुका है, तब भी इंसान तक पहुँचना अभी शेष है — यह भाव जब जिला न्यायाधीश माननीय हिदायत उल्ला ख़ान की नज़्म में गूँजा, तो पूरा सभागार मानवीय संवेदना, प्रेम और उत्तरदायित्व की भावनाओं से भर उठा।
बीते दिनों आत्मदर्शन टी.वी. के तत्वावधान में प्रेरणा सदन, धार रोड पर आयोजित भव्य अदबी मुशायरा नाइट साहित्य, संस्कृति और आध्यात्म का अनुपम संगम बनकर सामने आया।
कार्यक्रम की थीम “हम चमकना चाहते हैं, देर तक” रही, जिसमें शायरों ने प्रेम, सौहार्द, भाईचारे और राष्ट्रीय एकता का सशक्त संदेश दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में माननीय जिला न्यायाधीश श्री हिदायत उल्ला ख़ान की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।अपने प्रेरक उद्बोधन में जिला न्यायाधीश माननीय हिदायत उल्ला खान ने कहा कि प्रेम वह शक्ति है, जो समाज की दूरियों को मिटाकर राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करती है और देश को विकास के पथ पर अग्रसर करती है।उन्होंने शायरों से आह्वान किया कि वे अपनी रचनाओं के माध्यम से मानवीय मूल्यों, सद्भाव और एकजुट भारत के निर्माण का संदेश समाज तक पहुँचाएँ।

क्रिसमस पर्व पर भावपूर्ण काव्य प्रस्तुति
क्रिसमस के पावन अवसर पर माननीय जिला न्यायाधीश श्री खान द्वारा प्रस्तुत स्वरचित गीत प्रेम, शांति, करुणा और राष्ट्रनिर्माण के संकल्प से ओतप्रोत रहा। प्रस्तुति इतनी भावनात्मक रही कि श्रोता भावविभोर हो उठे और सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा।
कार्यक्रम की शुरुआत में श्री पुरुषोत्तम धाकड़ ने उभरते शायरों का स्वागत एवं सम्मान करते हुए उन्हें निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम की मेज़बानी आत्मदर्शन टीवी के सीईओ फादर आनंद ने की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सांस्कृतिक समरसता, आध्यात्मिक चेतना और आपसी सौहार्द को सुदृढ़ करते हैं।
मुशायरे का सधा हुआ और प्रभावी संचालन सचिन राव ‘विराट’ ने किया।
शायरों की शानदार प्रस्तुतियाँ
इस साहित्यिक संध्या में शायर
धीरज चौहान, शाहनवाज़ अंसारी, महेंद्र सिंह पवार, राहुल शर्मा उर्फ़ ‘राहिल’, यश शुक्ला, शौरभ, नदीम एवं अंश
ने अपनी नज़्मों और ग़ज़लों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम में फादर प्रीतम, पंकज नागर, रामस्वरूप नागर, ईशायू एवं आयुषी की गरिमामयी उपस्थिति भी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही।
संदेश जो समाज को दिशा देता है
समापन अवसर पर यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आया कि
क्रिसमस केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा और मानवता को अपनाने का संकल्प है।
और जब साहित्य अपनी आवाज़ इसमें मिलाता है, तो समाज को सकारात्मक दिशा और राष्ट्र को एकता की मजबूत बुनियाद मिलती है।
प्रेम, सौहार्द और राष्ट्रीय एकता के राष्ट्र-विकास संकल्प के साथ यह आयोजन एक स्मरणीय साहित्यिक उत्सव के रूप में लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

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