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ट्रंप की तानाशाही पर भारत ने जताई चिंता, शांतिपूर्ण बातचीत का आहृवान

नई दिल्ली। भारत ने रविवार को कहा कि वह वेनेजुएला में तेजी से बदल रही स्थिति पर करीब से नजर रख रहा है। यह स्थिति संयुक्त राज्य अमेरिका के एक सैन्य अभियान के बाद बनी है, जिसमें कथित तौर पर वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ लिया गया है।

विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में भारत ने इन घटनाओं को “गहरी चिंता” का मामला बताया और वेनेजुएला के लोगों की भलाई और सुरक्षा के लिए अपने समर्थन को दोहराया। नई दिल्ली ने सभी संबंधित पक्षों से शांतिपूर्ण बातचीत के माध्यम से मुद्दों को हल करने का आग्रह किया और क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने का आह्वान किया। MEA ने आगे कहा कि काराकास में भारतीय दूतावास भारतीय समुदाय के सदस्यों के संपर्क में है और सभी आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

भारत की यह प्रतिक्रिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा सोशल मीडिया पर यह घोषणा करने के बाद आई है कि अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के खिलाफ एक बड़ा हमला किया है, जिसके परिणामस्वरूप राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में ले लिया गया है। ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में, ट्रम्प ने कहा कि यह ऑपरेशन अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के समन्वय से किया गया था और उनके मार-ए-लागो आवास पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान और अधिक विवरण साझा किए जाएंगे।

अमेरिकी कार्रवाई पर विश्व स्तर पर तीखी और विभाजित प्रतिक्रियाएं आई हैं। जहां ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने मादुरो के शासन के अंत का स्वागत किया, वहीं कई लैटिन अमेरिकी देशों ने इस ऑपरेशन की निंदा की। वेनेजुएला के लंबे समय से सहयोगी रहे रूस और चीन ने भी इस कदम की आलोचना की, मॉस्को ने इसे सशस्त्र आक्रामकता का कार्य बताया और बीजिंग ने एक संप्रभु राष्ट्र के खिलाफ बल प्रयोग की निंदा की। ईरान ने इन हमलों को वेनेजुएला की संप्रभुता का घोर उल्लंघन बताया।

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