RAJGARH

जिला मुख्यालय के पास प्यासा टीटोडी गाँव, नाले के कुएँ से पानी भरने को मजबूर लोग

नाथ सपेरा समाज के परिवार आज भी सुरक्षित पेयजल से वंचित

लखन गुर्जर राजगढ़


जिला मुख्यालय के समीप बड़ी पुल से आगे स्थित टीटोडी गाँव में पेयजल संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। गाँव में निवासरत नाथ सपेरा समाज के कई परिवारों को आज भी ठंड, गर्मी और बरसात—तीनों मौसमों में—पास से गुजरने वाले नाले में बने कुएँ से पीने का पानी लाना पड़ रहा है। आश्चर्य की बात यह है कि जिला मुख्यालय के इतने नजदीक होने के बावजूद आज तक गाँव में न तो हैंडपंप लगाया गया है और न ही कोई स्थायी पेयजल व्यवस्था की गई है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि कुएँ तक पहुँचने के लिए उन्हें करीब 2 किलोमीटर की चढ़ावदार घाटी पार करनी पड़ती है। यह रास्ता बेहद दुर्गम और जोखिम भरा है। बरसात के मौसम में रास्ते में पड़ने वाला नाला उफान पर रहता है और खुला होने के कारण आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता है। ऐसी स्थिति में ग्रामीणों को नाला उतरने का इंतज़ार करना पड़ता है, तभी वे कुएँ से पानी भर पाते हैं।
स्थानीय निवासी संजय अभिषेक ने बताया कि नाले के कुएँ का पानी साफ नहीं है, फिर भी मजबूरी में वही पानी पीने और घरेलू उपयोग में लिया जा रहा है। इससे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं में बीमारियाँ फैलने का खतरा बना रहता है। कई बार मौसमी बीमारियाँ फैल चुकी हैं, लेकिन अब तक समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
सामाजिक कार्यकर्ता अंकित पीपलोटिया ने जानकारी देते हुए बताया कि उनका इस गाँव में नियमित आना-जाना रहता है और गाँव तक पहुँचने में भी कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों द्वारा जब उन्हें पेयजल संकट की जानकारी दी गई तो उन्होंने इस गंभीर समस्या को लेकर ग्रामीणों का आवेदन संबंधित विभाग में दिलवाया है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द सुरक्षित पेयजल व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।
ग्रामीणों का आरोप है कि नाथ सपेरा समाज के अधिकांश परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं और इसी कारण उन्हें सरकारी योजनाओं और बुनियादी सुविधाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि गाँव में शीघ्र हैंडपंप, नल-जल योजना या अन्य सुरक्षित पेयजल व्यवस्था की जाए, ताकि दूषित पानी से होने वाली बीमारियों से बचाव हो सके। जिला मुख्यालय के पास बसे इस गाँव की अनदेखी प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

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