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एआई बना रहा डायग्नोज को आसान… आने वाले 5 साल में मिलेगी और मजबूती’ नेत्र रोग विशेषज्ञों की तीन दिवसीय कांफ्रेंस का समापन

   इंदौर।बएमपी स्टेट ऑप्थैल्मोलॉजिकल सोसायटी के 49वें वार्षिक कॉन्फ्रेंस के तीसरे दिन नेत्र रोग के इलाज में आई के उपयोग पर चर्चा हुई। देशभर से आये विशेष विशेषज्ञों ने माना कि आई नेत्र रोग के इलाज में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। खासकर बीमारी के डायग्नोज में इसके रिजल्ट काफी अच्छे हैं।

आयोजन समिति के डॉ सतीश प्रेमचंदानी और डॉ अंशु खरे ने बताया कि अंतिम दिन रविवार को कुछ तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। वहीं दो क्विज कॉम्पिटिशन भी आयोजित किए गए। इस दौरान एमपी स्टेट ऑप्थैल्मोलॉजिकल सोसायटी के चुनाव भी हुई जिसमें डॉ आर एस चौधरी को प्रेसिडेंट चुना गया। कार्यक्रम मे दो डेमो वर्कशॉप भी आयोजित की गई। सम्मेलन में मध्यप्रदेश के विभिन्न शहरों से 700 से अधिक नेत्र रोग विशेषज्ञ शामिल हुए। प्रमुख रूप से इस क्षेत्र में हो रहे नवीनतम विकास, अत्याधुनिक तकनीकों, आधुनिक उपचार पद्धतियों और चिकित्सा क्षेत्र में हुए शोध पर चर्चा की जा रही है। तकनीकी सत्र को संबोधित करते हुए अरविंद आई इंस्टीट्यूट चेन्नई से आईं डॉ नीलम माहेश्वरी ने कहा कि मायोपिया के होने का कोई एक कारण नहीं कह सकते। यह मल्टी फैक्टोरियल डिजीज है और बच्चों में भी इसका बड़ा खतरा होता है। आज के समय की बदली लाइफस्टाइल के साथ ही पर्यावरण प्रदूषण भी इसका एक अब बड़ा कारण हैं। सबसे ज्यादा असर बच्चों पर नजर आता है, क्योंकि कई बार वह नहीं पाते, इसलिए इससे बचाव के लिए बाहरी एक्टिविटी बहुत जरूरी है। हम इसके लिए 20-20-20 रूल फॉलो करने की सलाह देते हैं।

डॉ आर एस चौधरी ने बताया कि एक सत्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का भी रहा, जिसमें मध्यप्रदेश स्टेट ऑप्थैल्मोलॉजिकल सोसायटी की सेक्रेटरी डॉ मिता जोशी के अलावा अन्य विशेषज्ञों ने इस क्षेत्र में एआई के वर्तमान इस्तेमाल और आगामी 5 साल की स्थिति पर बात की। डॉ जोशी ने बताया कि एआई का इस्तेमाल स्क्रीनिंग और डायग्नोज में किस तरह आसान हो सकता है। दूर दराज गांवों में जहां के लोग ना तो उतना सफर कर सकते हैं, न ही आर्थिक रूप से मजबूत होते हैं, उनके इलाज में एआई एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकता है। एआई की मदद से रेगुलर स्क्रीनिंग डोर स्टेप पर की जा सकती है। आने वाले 5 सालों में डायग्नोज में एआई का इस्तेमाल और बढ़ेगा।

अंतिम दिन आखिरी सत्र में एनेस्थीसिया स्पेशलिस्ट डॉ सुबोद चतुर्वेदी ने बेसिक लाइफ सपोर्ट (सीपीआर) पर बात कर उसके सही तरीके का डेमो दिया। सम्मेलन के समापन पर पीजी स्टूडेंट्स को डॉ रमेश कृष्णा अग्रवाल अवॉर्ड भी दिए गए।

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