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पैसा दोगुना करने का झांसा देकर 2 करोड़ की ठगी, 10 राज्यों में 30 हजार किमी पीछा कर अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश

राजगढ़ ब्यावरा। पैसे दोगुने करने और बड़ी कंपनी में निवेश पर भारी मुनाफे का लालच देकर ब्यावरा के एक व्यक्ति से 2 करोड़ रुपए की ठगी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का राजगढ़ पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने करीब 35 दिनों तक लगातार कार्रवाई करते हुए 10 राज्यों में लगभग 30 हजार किलोमीटर तक आरोपियों का पीछा किया और 3 हजार से अधिक CCTV फुटेज खंगालकर गिरोह के 14 सदस्यों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस के अनुसार आरोपियों के कब्जे से 1 करोड़ 73 लाख 16 हजार रुपए नकद, चार चार पहिया वाहन और 19 एंड्रॉयड मोबाइल फोन समेत कुल 2 करोड़ 92 लाख 91 हजार रुपए का मशरूका जब्त किया गया है। कार्रवाई थाना ब्यावरा शहर में दर्ज धोखाधड़ी के प्रकरण में की गई।

कंपनी में निवेश के नाम पर फंसाया

24 जुलाई 2026 को ब्यावरा निवासी देवेन्द्र पालीवाल ने पुलिस को शिकायत दी थी कि प्रफुल्ल गजभिये ने स्वयं को बड़ी कंपनी से जुड़े लोगों का परिचित बताते हुए निवेश की रकम दोगुनी करने का लालच दिया। इसके बाद अन्य आरोपियों से उसकी मुलाकात कराई गई। आरोपियों ने फर्जी ई-मेल, दस्तावेज और भुगतान संबंधी जानकारी दिखाकर उसे विश्वास में लिया।

आरोपियों ने 2 करोड़ रुपए निवेश करने पर इससे अधिक रकम वापस मिलने का भरोसा दिलाया। 22 जुलाई को भोपाल में फरियादी से 2 करोड़ रुपए नकद लिए गए। आरोपियों ने रकम को हवाला अथवा आंगड़िया के माध्यम से भेजने की बात कही और बाद में 4 करोड़ रुपए के RTGS का फर्जी स्क्रीनशॉट दिखाकर फरियादी को भरोसे में रखा। रकम वापस नहीं मिलने पर उसे ठगी का पता चला।

10 टीमों ने संभाला मोर्चा

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक राजगढ़ ने आरोपियों की गिरफ्तारी और ठगी की रकम की बरामदगी के लिए 10 विशेष टीमों का गठन किया, जिनमें करीब 50 पुलिस अधिकारी-कर्मचारी शामिल रहे।

आरोपियों की गतिविधियों और आपसी कनेक्शन का पता लगाने के लिए पुलिस ने विभिन्न राज्यों में 3 हजार से अधिक CCTV फुटेज खंगाले। करीब 35 दिनों तक लगातार कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, केरल, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा समेत 10 राज्यों में दबिश दी गई। इसके बाद अलग-अलग राज्यों से 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

कई स्तरों में बंटा था गिरोह

जांच में गिरोह की कार्यप्रणाली कई स्तरों में सामने आई। गिरोह पहले ऐसे व्यक्ति की तलाश करता था, जिसके पास बड़ी रकम हो। इसके बाद कंपनी, महंगी गाड़ियों, होटल में बैठकों और व्यवस्थित दस्तावेजों के जरिए उसका विश्वास जीता जाता था।

फर्जी ई-मेल, स्वीकृति-पत्र और भुगतान संदेशों के जरिए निवेश को वास्तविक बताया जाता था। इसके बाद अधिकतम राशि नकद में लेकर हवाला अथवा आंगड़िया नेटवर्क के जरिए अलग-अलग शहरों और व्यक्तियों तक पहुंचाई जाती थी। रकम मिलने के बाद गिरोह के सदस्य अपने मोबाइल नंबर, ठिकाने और शहर बदल देते थे।

पुलिस के मुताबिक गिरोह की खास बात यह थी कि आरोपी एक-दूसरे से सीमित स्तर पर जुड़े रहते थे। कई आरोपी अपना वास्तविक नाम छिपाकर ट्रेड नाम का इस्तेमाल करते थे, जिससे गिरोह की पूरी कड़ी का पता लगाना मुश्किल हो जाता था।

कंपनी के अधिकारी बनकर हासिल किया भरोसा

जांच में सामने आया कि माधव असोरे, सुजीत टेंबेकर और साहिल नीसवाडे ने फरियादी की पहचान कर उसे गिरोह के संपर्क में लाने में भूमिका निभाई। इसके बाद प्रफुल्ल गजभिये और सचित कामले ने कंपनी एजेंट, दिनेश वीरानी ने चार्टर्ड अकाउंटेंट और वासुदेव गाडेकर ने कंपनी के डायरेक्टर के रूप में खुद को प्रस्तुत किया।

भोपाल और ब्यावरा के होटल प्रेसिडेंट तथा होटल रेडिएंट में बैठकों के दौरान कंपनी और निवेश योजना को वास्तविक बताकर फरियादी को रकम देने के लिए तैयार किया गया।

कोरियर ऑफिस से लिए 2 करोड़

पुलिस जांच के अनुसार भोपाल के जहांगीराबाद स्थित बाबूलाल कांतीलाल कोरियर ऑफिस पर फरियादी से 2 करोड़ रुपए नकद लिए गए। पुलिस के मुताबिक आंगड़िया हेड आरिफ हुसैन के कहने पर सन्नी उर्फ शमीम मंडल और मुस्कीम मंडल रकम लेने पहुंचे थे। दोनों ने नकदी लेने के बाद फरियादी को 4 करोड़ रुपए के RTGS का फर्जी स्क्रीनशॉट दिखाया और वहां से फरार हो गए।

इसके बाद रकम को अलग-अलग लोगों और स्थानों तक पहुंचाने, बांटने तथा खपाने में आरिफ हुसैन, नवीन जैन, कांतीलाल उर्फ कमल, अशोक चौधरी और बोनी यामीन की भूमिका सामने आई।

14 आरोपी गिरफ्तार, करोड़ों का माल जब्त

पुलिस ने गिरोह के 14 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से कुल 1,73,16,000 रुपए नकद, चार वाहन जिनकी कीमत करीब 1,12,00,000 रुपए तथा 19 एंड्रॉयड मोबाइल फोन जिनकी कीमत करीब 7,75,000 रुपए बताई गई है। इस तरह कुल 2,92,91,000 रुपए का मशरूका जब्त किया गया।

इंदौर में भी ठगी की थी तैयारी

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने इंदौर में इसी तरह की धोखाधड़ी करने की योजना बनाई थी, लेकिन राजगढ़ पुलिस की कार्रवाई में आरोपियों की गिरफ्तारी होने से यह योजना सफल नहीं हो सकी।

पुलिस के अनुसार आरोपियों द्वारा पश्चिम बंगाल में करीब 50 लाख रुपए तथा दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी के साथ भी करीब 50 लाख रुपए की धोखाधड़ी किए जाने की जानकारी सामने आई है। गिरोह से जुड़े कार्यालय उदयपुर, पश्चिम बंगाल, इंदौर, भोपाल, दिल्ली और मुंबई में होने की जानकारी भी पुलिस को मिली है। इन सभी बिंदुओं पर आगे जांच की जा रही है।

अन्य आरोपियों और नेटवर्क की तलाश जारी

पुलिस आरोपियों से पूछताछ के आधार पर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों, फर्जी कंपनी और ई-मेल संचालन, हवाला-आंगड़िया नेटवर्क, बैंक खातों तथा ठगी की रकम के लेन-देन की जानकारी जुटा रही है। जब्त मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की तकनीकी जांच भी जारी है।

इस कार्रवाई में राजगढ़ पुलिस की विशेष टीम के साथ मुंबई, नांदेड़, लातूर, भदोही, पुणे, हैदराबाद, केरल, तेलंगाना और भोपाल की पुलिस टीमों का भी सहयोग रहा।

पुलिस की अपील

राजगढ़ पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि कम समय में पैसा दोगुना करने, अत्यधिक मुनाफा देने या किसी बड़ी कंपनी के नाम पर निवेश का लालच देने वाले लोगों पर बिना सत्यापन भरोसा न करें। किसी भी निवेश से पहले संबंधित कंपनी और योजना की आधिकारिक माध्यम से पूरी जानकारी और सत्यापन जरूर करें।

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