किसानों के मुद्दों पर सरकार को घेरा, आंदोलन की दी चेतावनी
7 मई के चक्का जाम को लेकर कांग्रेस की प्रेस वार्ता

राजगढ़। आगामी 7 मई को प्रस्तावित प्रदेशव्यापी चक्का जाम आंदोलन को लेकर जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रेस वार्ता आयोजित कर किसानों की समस्याओं को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के किसान उपार्जन केन्द्रों की अव्यवस्था, भुगतान में देरी, टोकन सिस्टम की खामियों और खाद-बीज की कमी से त्रस्त हैं।
जिला अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि समर्थन मूल्य पर खरीदी की व्यवस्था जमीन पर प्रभावी नहीं है। किसानों को कई-कई दिनों तक उपार्जन केन्द्रों पर इंतजार करना पड़ रहा है। स्लॉट बुकिंग व्यवस्था और तुलाई प्रणाली में पारदर्शिता की कमी के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खुले में रखी फसल खराब होने का खतरा भी बना रहता है।
उन्होंने कहा कि घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और वास्तविक भुगतान के बीच अंतर की शिकायतें सामने आ रही हैं। गेहूं और सोयाबीन की राशि समय पर नहीं मिलने से किसान कर्ज के जाल में फंस रहे हैं। खाद, डीएपी, यूरिया और जूट बैग की कमी को भी गंभीर समस्या बताया गया।
नरवाई प्रबंधन को लेकर की जा रही कार्रवाई पर भी सवाल उठाते हुए कहा गया कि किसानों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। साथ ही लंबित कर्ज माफी, बीमा और आपदा मुआवजा भुगतान को लेकर सरकार से स्पष्ट रोडमैप की मांग की गई।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें
समर्थन मूल्य पर फसल की गारंटीड खरीदी
7 दिन के भीतर भुगतान की कानूनी गारंटी
उपार्जन केन्द्रों की संख्या और क्षमता दोगुनी करना
खाद, बीज और जूट बैग की पर्याप्त उपलब्धता
बीमा और मुआवजा भुगतान की समय-सीमा तय करना
कर्ज माफी और ब्याज राहत पर स्पष्ट नीति
जिला अध्यक्ष ने कहा कि यदि किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो 7 मई को शांतिपूर्ण चक्का जाम आंदोलन किया जाएगा।
