मध्यप्रदेश

लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर प्रहार: सोहागपुर एरिया सेल्स ऑफिस में कथित दुर्व्यवहार, जांच की मांग तेज

 

 

शहडोल/धनपुरी। मोहम्मद असलम बाबा कोयलांचल में पद और सत्ता के कथित दुरुपयोग का एक गंभीर मामला सामने आया है। South Eastern Coalfields Limited (SECL) के सोहागपुर क्षेत्र स्थित एरिया सेल्स ऑफिस में पदस्थ टेक्निकल इंस्पेक्टर रोशन तोदी पर एक पत्रकार के साथ अभद्र व्यवहार और धमकी देने के आरोप लगे हैं। घटना के बाद पीड़ित पत्रकार ने मुख्य महाप्रबंधक (GM) को लिखित शिकायत सौंपकर उच्चस्तरीय जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

“दोबारा दिखे तो जूतों से बात करूँगा” — गंभीर आरोप

शिकायत के अनुसार 19 फरवरी को दैनिक जय संगवारी व साप्ताहिक ‘जोगी एक्सप्रेस’ के मुख्य संपादक अतीकुर्रहमान एक परिचित से मिलने सेल्स ऑफिस पहुँचे थे। आरोप है कि वहाँ मौजूद टेक्निकल इंस्पेक्टर रोशन तोदी ने बिना उकसावे के सार्वजनिक रूप से अपमानित किया और कहा—

“तुम रोज-रोज साहब से शिकायत करने आते हो, दोबारा यहाँ दिखे तो जूतों से बात करूँगा।”

पीड़ित का दावा है कि उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने और जान से मारने तक की धमकी दी गई। घटना के समय फोन स्पीकर पर होने की बात कही गई है, जिसे एक अन्य व्यक्ति ने भी सुना होने का दावा किया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

पत्रकारिता पेशे पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी

शिकायत में यह भी उल्लेख है कि पत्रकारिता जैसे पेशे को लेकर अपमानजनक टिप्पणियाँ की गईं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल व्यक्तिगत मर्यादा का उल्लंघन है, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता की गरिमा पर भी प्रश्नचिह्न है।

पीड़ित पत्रकार ने कहा—

“मैं इस घटना से मानसिक रूप से असुरक्षित महसूस कर रहा हूँ। यदि सरकारी अधिकारी ही कानून और शिष्टाचार की मर्यादा तोड़ेंगे, तो आम नागरिक अपनी बात किसके सामने रखेगा?”

GM को ज्ञापन, उच्च स्तर तक प्रतिलिपि

मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायत की प्रतिलिपि केंद्रीय कोयला मंत्री, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री, कोल इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन और SECL मुख्यालय बिलासपुर को भेजे जाने की जानकारी दी गई है। अब नजरें सोहागपुर क्षेत्र के GM पर हैं—क्या वे निष्पक्ष जांच का आदेश देंगे?

आय से अधिक संपत्ति और अवैध वसूली के भी आरोप

मामला यहीं तक सीमित नहीं है। स्थानीय स्तर पर रोशन तोदी की संपत्ति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि एक “मामूली टेक्निकल इंस्पेक्टर” ने कम समय में आलीशान बंगला, महंगी गाड़ियाँ और बड़े शहरों में संपत्ति अर्जित की है। यह भी कहा जा रहा है कि कथित तौर पर रिश्तेदारों के खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर की गई। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, परंतु जांच की मांग जोर पकड़ रही है।

सूत्रों के हवाले से यह भी आरोप लगाया गया है कि कोयला क्रय करने वाले व्यापारियों से “डीओ चढ़ाने” और गैलरी से कोयला उठाने के नाम पर प्रति टन ₹230 तक वसूले जाते हैं। कुछ व्यापारियों ने नाम न छापने की शर्त पर कथित वसूली का दावा किया है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारी या प्रबंधन की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

यदि ये आरोप तथ्यात्मक हैं, तो सवाल और गंभीर हो जाता है—क्या यह कथित वसूली किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा है? क्या रकम ऊपर तक पहुँचती है? या फिर यह सब निराधार है और किसी साजिश का परिणाम? सच क्या है, यह केवल निष्पक्ष जांच से ही स्पष्ट हो सकता है।

बड़ा सवाल: कार्रवाई कब?

कोयला क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग नई नहीं है, लेकिन हर बार शिकायतें फाइलों में दब जाने का आरोप लगता रहा है। अब प्रश्न सीधा है—

क्या GM तत्काल विभागीय जांच बैठाएंगे?

क्या आय-व्यय और संपत्ति की स्वतंत्र ऑडिट होगी?

क्या पत्रकार से कथित दुर्व्यवहार पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी?

या फिर “दूध देने वाली गाय को प्रणाम” वाली कहावत ही सच साबित होगी?

*सबकी नज़र मुख्य महप्रबंधक पर* 

यह मामला केवल एक व्यक्ति बनाम अधिकारी का नहीं, बल्कि संस्थागत जवाबदेही का है। यदि आरोप गलत हैं, तो अधिकारी को सार्वजनिक रूप से क्लीन चिट मिलनी चाहिए। और यदि आरोपों में दम है, तो सख्त कार्रवाई कर यह संदेश दिया जाना चाहिए कि SECL में पद का अर्थ मनमानी नहीं है।

अब सबकी नजरें सोहागपुर प्रबंधन पर हैं—क्या भ्रष्टाचार और दुराचार के आरोपों पर अंकुश लगेगा, या फिर यह सिलसिला यूँ ही अनवरत चलता रहेगा?

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