कलम के कसाइयों ने किया ‘शिक्षा का चीरहरण’: ब्लैकबोर्ड पर सजाई गई नकल की मंडी!
अनूपपुर का 'लतार' स्कूल बना 'नकल माफिया' का अड्डा: 8वीं की बोर्ड परीक्षा में शिक्षकों ने खुद बांटे उत्तर, विरोध करने वाली मेधावी छात्रा को भी बनाया शिकार!
विशेष खोजी रिपोर्ट: अनूपपुर (म.प्र.) मोहम्मद असलम बाबा शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले स्कूलों में जब ‘गुरु’ ही ‘चोर’ बन जाएं, तो समाज का पतन निश्चित है। अनूपपुर के भालूमाड़ा थाना अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, लतार में जो हुआ, वह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के भविष्य के साथ किया गया जघन्य अपराध है। दिनांक 20 फरवरी 2026 को 8वीं की बोर्ड परीक्षा के दौरान, इस केंद्र पर शिक्षा के पैरोकारों ने नैतिकता की सारी हदें पार कर दीं।
ब्लैकबोर्ड पर ‘नकल का तांडव’: क्या यही है सरकारी स्कूल का स्तर? सोमेश्वर नारायण पाठक की शिकायत ने उस खौफनाक सच से पर्दा उठाया है, जिसे दबाने के लिए स्कूल प्रबंधन ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था। उनकी पुत्री, प्रतीभा नंदिनी पाठक, जब परीक्षा केंद्र पहुंची, तो उसने वहां शिक्षकों को ‘भगवान’ के रूप में नहीं, बल्कि ‘नकल माफिया के गुर्गों’ के रूप में पाया।
शिकायत के मुताबिक, “अनिल सर” नामक शिक्षक ने परीक्षा कक्ष के ब्लैकबोर्ड को ‘गाइड’ बना दिया। सरेआम सवालों के जवाब बोर्ड पर लिखे गए और मासूम बच्चों को ‘चोरी’ का पाठ पढ़ाया गया। हद तो तब हो गई जब मेधावी छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं छीनकर उन गधों को दी गईं जो साल भर किताब को हाथ तक नहीं लगाते। क्या प्रशासन सो रहा है? या फिर ‘सामूहिक नकल’ के इस काले कारोबार में ऊपर तक हिस्सा पहुंच रहा है?
‘नकल’ का दबाव: ईमानदारी पर व्यवस्था का प्रहार! इस पूरे प्रकरण का सबसे वीभत्कारी पहलू यह है कि एक ईमानदार छात्रा को, जो अपनी मेहनत से परीक्षा देना चाहती थी, ड्यूटी पर तैनात शिक्षकों ने नकल करने के लिए मजबूर किया। बार-बार दबाव डालकर उसे दो प्रश्नों के उत्तर नकल करने पर विवश किया गया। यह किसी मानसिक प्रताड़ना से कम नहीं है। व्यवस्था ने एक बच्ची के स्वाभिमान को कुचलने की कोशिश की ताकि उनकी ‘नकल की दुकान’ निर्बाध रूप से चलती रहे।
केंद्र अध्यक्ष की बेशर्मी: “पासिंग मार्क के लिए तो चोरी जायज है!” जब पीड़ित पिता ने इस ‘नकल कांड’ का विरोध किया और केंद्र अध्यक्ष प्रेमजीत प्रजापति को घेरा, तो उनका जवाब सुनकर किसी भी स्वाभिमानी नागरिक का खून खौल उठेगा। केंद्र अध्यक्ष ने बड़े ही निर्लज्ज अंदाज में स्वीकार किया कि— “नकल तो केवल पास कराने के लिए कराई गई है।” साहब! क्या अब चोरी करना ‘समाज सेवा’ हो गया है? क्या बोर्ड की परीक्षा अब केवल खानापूर्ति रह गई है? केंद्र अध्यक्ष का यह बयान सीधे तौर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के मुंह पर तमाचा है, जो ‘नकल विहीन परीक्षा’ का ढोल पीटते नहीं थकते।
प्रशासन को सीधी चुनौती: क्या दोषियों को मिलेगी जेल की सलाखें? यह पत्र केवल एक शिकायत नहीं, बल्कि उस सड़ी-गली व्यवस्था के खिलाफ विद्रोह का बिगुल है। सोमेश्वर नारायण पाठक ने भालूमाड़ा थाने में शिकायत दर्ज कराकर अपनी बहादुरी का परिचय दिया है। अब गेंद पुलिस और जिला प्रशासन के पाले में है।
: 1. क्या ‘अनिल सर’ जैसे शिक्षकों को तुरंत निलंबित कर जेल नहीं भेजा जाना चाहिए?
2. क्या उस केंद्र अध्यक्ष पर मुकदमा नहीं चलना चाहिए जिसने इस अपराध को संरक्षण दिया?
3. क्या प्रशासन इस स्कूल में हुई परीक्षा को रद्द कर दोबारा कड़ी निगरानी में परीक्षा कराएगा?
अगर आज इन ‘सफेदपोश अपराधियों’ पर कार्रवाई नहीं हुई, तो कल प्रदेश का हर परीक्षा केंद्र ‘नकल का अड्डा’ बन जाएगा। यह लड़ाई केवल एक छात्रा की नहीं, बल्कि हर उस विद्यार्थी की है जो दिन-रात पसीना बहाकर पढ़ाई करता है।



