गोफ एरिया में निर्माण का खेल : क्या कमीशनखोरी के लिए खतरे में डाली जा रही धनपुरी की जनता की जान?
धनपुरी(शहडोल)। मोहम्मद असलम बाबा नगर पालिका धनपुरी एक बार फिर सवालों के घेरे में है। विकास के नाम पर किए जा रहे निर्माण कार्य अब सीधे-सीधे नागरिकों की जान के साथ खिलवाड़ करते नजर आ रहे हैं। एसईसीएल की लीज पर ली गई और कोयला उत्खनन के बाद गोफ एरिया घोषित भूमि पर निर्माण कार्य कराने की जल्दबाजी ने प्रशासनिक जिम्मेदारियों और जनसुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त दस्तावेजों और निरीक्षण रिपोर्ट के अनुसार एसईसीएल, बुढ़ार-शारदा उपक्षेत्र की लीज भूमि, जो खनन के बाद संवेदनशील और दुर्घटना संभावित क्षेत्र मानी जाती है, वहां नगर पालिका धनपुरी के आदेश पर निर्माण कार्य कराए जाने की तैयारी की जा रही है। यह वही क्षेत्र है जहां जमीन के नीचे पहले कोयला उत्खनन हो चुका है और भू-धंसान (गोफ) का खतरा हमेशा बना रहता है। ऐसे इलाके में किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य न केवल नियमों के विरुद्ध है बल्कि सीधे तौर पर लोगों की जान को खतरे में डालने जैसा है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब यह भूमि एसईसीएल की लीज पर है और इसे खनन प्रभावित क्षेत्र घोषित किया जा चुका है, तब नगर पालिका आखिर किस अधिकार और किस दस्तावेज के आधार पर निर्माण कार्य कराने की तैयारी कर रही है? जानकारों का कहना है कि ऐसे क्षेत्रों में निर्माण से पहले तहसील कार्यालय से संपूर्ण राजस्व अभिलेख, भू-अभिलेख और तकनीकी स्वीकृति लेना अनिवार्य होता है। लेकिन यहां ऐसा कोई स्पष्ट प्रमाण सामने नहीं आया है।
सूत्रों के अनुसार नगर पालिका के कुछ पार्षद और अधिकारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी को गुमराह कर निर्माण कार्य को जल्द शुरू कराने के दबाव में हैं। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि पूरा मामला मोटे कमीशन के खेल से जुड़ा हुआ है। विकास के नाम पर चल रहे इस खेल में नागरिकों की सुरक्षा को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों में इस मामले को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि गोफ एरिया में निर्माण किया गया तो भविष्य में बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। जमीन धंसने की स्थिति में दर्जनों परिवार प्रभावित हो सकते हैं। बावजूद इसके नगर पालिका प्रशासन की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में निर्माण कार्य करना तकनीकी रूप से बेहद जोखिम भरा होता है। ऐसे क्षेत्रों में पहले भू-वैज्ञानिक सर्वे, सुरक्षा मूल्यांकन और राज्य स्तर की स्वीकृति जरूरी होती है। लेकिन धनपुरी में इन सभी नियमों को दरकिनार कर जल्दबाजी में कार्य कराने की कोशिश प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा कर रही है।
नगर पालिका के कामकाज पर नजर रखने वाले सामाजिक संगठनों का आरोप है कि वर्तमान स्थिति में पार्षदों का प्राथमिक उद्देश्य जनहित नहीं बल्कि आर्थिक लाभ प्राप्त करना बन चुका है। विकास कार्यों की आड़ में शहर को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के बजाय उसे वर्षों पीछे धकेलने की तैयारी की जा रही है।
धनपुरी नगर पालिका में बैठे जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि यदि समय रहते इस मामले पर गंभीरता नहीं दिखाते हैं, तो यह लापरवाही भविष्य में बड़े जनहानि का कारण बन सकती है। प्रशासन की पहली जिम्मेदारी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होती है, लेकिन यहां हालात इसके बिल्कुल उलट दिखाई दे रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं। यदि जल्द ही जांच कर निर्माण कार्य पर रोक नहीं लगाई गई, तो यह मामला केवल प्रशासनिक विफलता ही नहीं बल्कि जनसुरक्षा के साथ खुलेआम खिलवाड़ का उदाहरण बन सकता है।




