मध्यप्रदेश

समाज हित के प्रयास ही राष्ट्र निर्माण की आधारशिला – जिला न्यायाधीश हिदायत उल्ला खान 

राष्ट्रीय उत्पादकता दिवस पर सब जेल देपालपुर में सुधार , संकल्प और समन्वय के संगम का प्रेरक आयोजन

देपालपुर(इंदौर) – राष्ट्रीय उत्पादकता दिवस के अवसर पर सब जेल देपालपुर में तहसील विधिक सेवा समिति एवं जेल प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन समिति के अध्यक्ष एवं जिला न्यायाधीश हिदायत उल्ला खान के मुख्य आतिथ्य में किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला न्यायाधीश श्री हिदायत उल्ला ख़ान ने कहा कि उत्पादकता केवल उत्पादन बढ़ाने का साधन नहीं, बल्कि जीवन को सकारात्मक दिशा देने का सशक्त संकल्प भी है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्पादकता का वास्तविक अर्थ केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि व्यक्ति के समय, श्रम, कौशल और चरित्र का समन्वित विकास है तथा न्यायालय और जेल प्रशासन के संयुक्त प्रयासों का उद्देश्य भी यही है कि दंड व्यवस्था को सुधार और पुनर्वास की प्रक्रिया में रूपांतरित किया जाए।

जिला न्यायाधीश श्री ख़ान ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में कहा कि आधुनिक न्याय प्रणाली केवल अपराध के दंड तक सीमित नहीं है, बल्कि वह व्यक्ति के पुनर्निर्माण और समाज में पुनर्स्थापन की दिशा में भी कार्य करती है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कौशल और शिक्षा आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त करते हैं और सकारात्मक सोच ही व्यक्ति को परिस्थितियों से ऊपर उठने की शक्ति देती है।

कार्यक्रम के दौरान जिला न्यायाधीश हिदायत उल्ला खान ने बंदियों को यह संदेश देकर प्रेरित किया कि हर दिन को उत्पादक बनाएं, हर व्यक्ति को सक्षम बनाएं और हर प्रयास को समाजहित से जोड़ें।

उक्त जागरूकता शिविर में वरिष्ठ न्यायाधीश श्रीमती रिजवाना कौसर, सुमित्रा ताहेड़, दिव्या श्रीवास्तव, प्रभारी सहायक जेल अधीक्षक रामेश्वर झणिया,प्रहरी राजेश भूरिया,रविंद्र सोलंकी, विवेक शर्मा,महिला प्रहरी एकता पटेल,आरती सोलिया,नर्स शिवानी श्रीवास्तव, नायब नाजिर दिलीप यादव सहित समस्त जेल स्टाफ एवं बंदीगण उपस्थित रहे।

राष्ट्रीय उत्पादकता दिवस के परिप्रेक्ष्य में यह आयोजन इस बात का सशक्त उदाहरण बना कि जब न्यायालय, जेल प्रशासन और समाज एक साथ मिलकर व्यक्ति के सुधार और सशक्तिकरण की दिशा में कार्य करते हैं, तब उत्पादकता केवल एक आर्थिक अवधारणा नहीं रह जाती, बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बन जाती है।

यह कार्यक्रम सुधार, संकल्प और समन्वय का ऐसा संगम रहा, जिसने यह सिद्ध किया कि सकारात्मक प्रयासों से हर परिस्थिति को प्रगति में बदला जा सकता है।

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