मध्यप्रदेश

अन्नदाता के द्वार पहुँचा प्रशासन: धनपुरी हलके में शनिवार से ‘फार्मर रजिस्ट्रेशन’ का महा-अभियान; डुढहा टोला से होगा आगाज

​डिजिटल क्रांति: अब पट्टे की जमीन का होगा ऑनलाइन हिसाब, पटवारी विजय विश्वकर्मा स्कूल में लगाएंगे चौपाल; बिचौलियों का खेल होगा खत्म

 

 

 


​धनपुरी (मध्य प्रदेश) | असलम बाबा खेतीकिसानी को आधुनिक बनाने और सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता लाने की दिशा में राजस्व विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है। धनपुरी हल्का पटवारी विजय विश्वकर्मा के नेतृत्व में शनिवार, 7 फरवरी 2026 से किसान पंजीयन (Farmer Registration) के लिए विशेष शिविरों की श्रृंखला शुरू हो रही है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक पट्टा धारी किसान को डिजिटल पोर्टल से जोड़ना है, ताकि उन्हें भविष्य में किसी भी सरकारी लाभ के लिए दफ्तरों की ठोकरें न खानी पड़ें।
​कैंप शेड्यूल: डुढहा टोला और सिलपरी से होगी शुरुआत
​प्रशासन ने इस अभियान को चरणों में विभाजित किया है ताकि भीड़ प्रबंधन और डेटा एंट्री का कार्य सुचारू रूप से चल सके:
​शनिवार सुबह 11:00 बजे: अभियान का विधिवत शुभारंभ डुढहा टोला स्थित शासकीय स्कूल में किया जाएगा।
प्राथमिकता: शनिवार को होने वाले प्रथम शिविर में डुढहा टोला एवं सिलपरी गांव के पट्टा धारियों का पंजीयन प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।
​वार्ड स्तरीय कवरेज: प्रारंभिक चरण के सफल समापन के बाद, पटवारी द्वारा धनपुरी हलके के अंतर्गत आने वाले तमाम वार्डों में मोहल्ला-वार कैंप लगाए जाएंगे। प्रशासन की योजना है कि किसानों के पास खुद चलकर जाया जाए, जिससे बुजुर्ग और अशिक्षित किसानों को पंजीयन में कोई असुविधा न हो।
​फार्मर रजिस्ट्रेशन की खूबियां: आखिर क्यों जरूरी है यह प्रक्रिया?
​विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह पंजीयन किसानों के लिए एक ‘सुरक्षा कवच’ की तरह है। इसके प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:
​उपज की गारंटीकृत खरीदी: समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं, धान या अन्य फसलें बेचने के लिए पोर्टल पर पंजीयन अनिवार्य है। बिना इसके, किसान सरकारी गोदामों में अपनी फसल नहीं दे पाएंगे।
​सरकारी योजनाओं का ‘सिंगल विंडो’ एक्सेस: एक बार पंजीयन होने के बाद, किसान को पीएम किसान सम्मान निधि, मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना और फसल बीमा का लाभ स्वतः मिलने का मार्ग प्रशस्त हो जाता है।
​पारदर्शी मुआवजा प्रणाली: यदि भविष्य में सूखे या अत्यधिक वर्षा जैसी प्राकृतिक आपदा आती है, तो क्षतिपूर्ति की राशि सीधे उन्हीं किसानों के खातों में भेजी जाती है जिनका रकबा और फसल रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज होता है।
​रियायती इनपुट्स की उपलब्धता: समितियों से खाद (यूरिया, डीएपी) और प्रमाणित बीज प्राप्त करने के लिए अब डिजिटल रिकॉर्ड को आधार बनाया जा रहा है। पंजीयन होने से खाद की कालाबाजारी पर अंकुश लगेगा।
​बैंकिंग सुविधाओं में आसानी: किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) बनवाने या कृषि ऋण के नवीनीकरण के लिए अब बार-बार खसरा-नक्शा की कॉपी नहीं देनी होगी, ऑनलाइन रिकॉर्ड ही पर्याप्त होगा।
​पटवारी की तैयारी: मौके पर ही होगा सत्यापन
​पटवारी विजय विश्वकर्मा ने बताया कि कैंप के दौरान तकनीकी टीम भी मौजूद रहेगी जो मौके पर ही दस्तावेजों का मिलान करेगी। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपने साथ निम्नलिखित दस्तावेज अनिवार्य रूप से लाएं:
​मूल पट्टा एवं उसकी फोटोकॉपी।
​आधार कार्ड (मोबाइल नंबर से लिंक होना अनिवार्य)।
​बैंक पासबुक की स्पष्ट छायाप्रति (जिसमें IFSC कोड अंकित हो)।
​स्वयं का सक्रिय मोबाइल नंबर।
विशेष अपील: > यह अभियान आपकी आर्थिक उन्नति के लिए है। शनिवार को समय पर शासकीय स्कूल, डुढहा टोला पहुँचें। याद रखें, आपका एक सही पंजीयन आपको बिचौलियों के चंगुल से बचा सकता है और आपकी मेहनत का पूरा मोल दिला सकता है।

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