अब जबलपुर में भी चलेगा एनीमिया जागरूकता अभियान

डॉ. द्विवेदी ने बताया कि पिछले 27 वर्षों से सतत रूप से संचालित एनीमिया जागरूकता अभियान को केंद्रीय स्तर पर व्यापक सराहना प्राप्त हुई है। निरंतर जनसेवा, शोध एवं जनजागरूकता के प्रयासों के परिणामस्वरूप भारत सरकार एवं आयुष मंत्रालय द्वारा उन्हें समय-समय पर महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दायित्व सौंपे जाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह अभियान अब केवल इंदौर तक सीमित न रहकर पूरे मध्यप्रदेश में विस्तार के साथ देशभर में लागू किए जाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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22 फरवरी से 1 मार्च तक इंदौर में विशेष अभियान
डॉ. द्विवेदी ने जानकारी दी कि इस वर्ष इंदौर में एनीमिया जागरूकता अभियान 22 फरवरी से 1 मार्च तक संचालित किया जाएगा। अभियान का समापन एक राष्ट्रीय होम्योपैथी सम्मेलन के रूप में किया जाएगा, जिसमें जबलपुर से होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (म.प्र. शाखा) के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में होम्योपैथी चिकित्सक सहभागिता करेंगे।
इस अभियान में इंदौर सांसद सेवा प्रकल्प मुख्य सहयोगी की भूमिका निभाएगा।
अभियान का संचालन आयुष मेडिकल वेलफेयर फाउंडेशन, एडवांस्ड होम्योपैथी सोसायटी तथा सेहत एवं सूरत के संयुक्त तत्वावधान में किया जाएगा। प्रशिक्षित चिकित्सा दल द्वारा घर-घर जाकर एनीमिया के लक्षण, रोकथाम एवं पोषण संबंधी जानकारी दी जाएगी। इस वर्ष अभियान को सफल बनाने में जबलपुर के होम्योपैथी चिकित्सकों का विशेष सहयोग भी प्राप्त होगा।
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घर-घर पहुँचेगा जागरूकता संदेश
डॉ. द्विवेदी के नेतृत्व में इस वर्ष अभियान को अधिक व्यापक और जन-जन तक पहुँचने वाला स्वरूप दिया गया है। यह पहल अब अस्पतालों और सभागारों तक सीमित न रहकर सीधे आम नागरिकों के घरों तक पहुँचेगी।
अभियान के अंतर्गत एनीमिया के सामान्य लेकिन अक्सर अनदेखे लक्षण—
• लगातार कमजोरी
• थकान
• भूख न लगना
• शरीर में दर्द
• चक्कर आना
• त्वचा एवं आँखों में पीलापन
—के प्रति लोगों को जागरूक किया जाएगा। आवश्यकता अनुसार निःशुल्क होम्योपैथिक औषधियाँ एवं हीमोग्लोबिन जाँच की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
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पोषण पर विशेष फोकस
पोषण को अभियान का महत्वपूर्ण आधार बनाते हुए भुना चना, गुड़, पिंड खजूर (खारक), किशमिश आदि का वितरण किया जाएगा, ताकि आयरन की कमी को प्राकृतिक, सरल एवं सुलभ तरीकों से दूर करने का संदेश प्रभावी रूप से जनसामान्य तक पहुँच सके।
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पूरे प्रदेश में 70 लाख लोगों तक पहुँचने का लक्ष्य
इस वर्ष एनीमिया जागरूकता रथ के माध्यम से पूरे मध्यप्रदेश में 70 लाख से अधिक लोगों तक पहुँचने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। चिकित्सा छात्रों की सक्रिय भागीदारी, घर-घर संपर्क एवं ऑन-ग्राउंड स्क्रीनिंग इस अभियान को व्यावहारिक, मानवीय एवं परिणामोन्मुख बनाती है।
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आयुष एवं एकीकृत चिकित्सा पर सरकार का जोर
प्रेस वार्ता में डॉ. द्विवेदी ने कहा कि भारत औषधीय संभावनाओं से समृद्ध देश है। भारत सरकार आयुष आधारित शोध को नई दिशा दे रही है तथा आयुर्वेद एवं होम्योपैथी को निरंतर सशक्त बना रही है। अब सरकारी अस्पतालों में एलोपैथी के साथ-साथ आयुर्वेद एवं होम्योपैथी विशेषज्ञों की नियुक्ति भी की जा रही है, जिससे मरीजों को एक ही स्थान पर एकीकृत चिकित्सा का लाभ मिल सके।
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राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण दायित्व
गौरतलब है कि आयुष मंत्रालय द्वारा डॉ. ए.के. द्विवेदी को शिलांग (मेघालय) स्थित नार्थ ईस्टर्न इंस्टिट्यूट ऑफ आयुर्वेद एवं होम्योपैथी की वैज्ञानिक सलाहकार समिति में सदस्य (होम्योपैथी विशेषज्ञ) के रूप में नामित किया गया है। इसके अतिरिक्त वे वर्ष 2015 से सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन होम्योपैथी के वैज्ञानिक सलाहकार बोर्ड के सदस्य के रूप में भी सेवाएँ दे रहे हैं।
अप्लास्टिक एनीमिया एवं हीमैटोहाइड्रोसिस जैसी दुर्लभ बीमारियों के उपचार में उनकी विशेषज्ञता के कारण देशभर से मरीज उपचार हेतु इंदौर पहुँचते हैं।
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जबलपुर के चिकित्सकों का सहयोग
जबलपुर के वरिष्ठ होम्योपैथी चिकित्सक —
डॉ. आर. के. चतुर्वेदी
डॉ. आर. के. गुप्ता
डॉ. अवधेश भट्ट
डॉ. अल्केश खत्री
डॉ. तुलाराम लडिया
डॉ. विशाल उपाध्याय
— प्रेस वार्ता में उपस्थित रहे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एनीमिया जागरूकता रथ संचालन में डॉ. ए.के. द्विवेदी के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में उत्कृष्ट कार्य किया जाएगा तथा इस अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप दिया जाएगा।


