शहडोल में कानून बेदम! पुश्तैनी जमीन पर दबंगों का कब्ज़ा, स्थगन आदेश के बाद भी जारी निर्माण—बुढ़ार पुलिस पर संरक्षण देने का आरोप

शहडोल। जिले के बुढ़ार तहसील अंतर्गत ग्राम पकरिया से पुश्तैनी जमीन पर अवैध कब्जे, धमकी, फर्जीवाड़े और प्रशासनिक आदेशों की खुलेआम अवमानना का गंभीर मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता ने न केवल अवैध कब्जे का आरोप लगाया है, बल्कि यह भी दावा किया है कि एसडीएम सोहागपुर द्वारा जारी किए गए स्थगन आदेश के बावजूद अतिक्रमणकारी निर्माण कार्य बंद करने को तैयार नहीं हैं। यही नहीं, पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि बुढ़ार पुलिस आरोपियों को संरक्षण दे रही है, जिसके कारण दबंगों के हौसले और भी बुलंद हैं।
शिकायतकर्ता अमरनाथ साहू, पिता स्व. जयकरण साहू, निवासी वार्ड क्रमांक 5 पुरानी बस्ती बुढ़ार ने तहसीलदार और थाना प्रभारी को लिखित आवेदन देकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने बताया कि ग्राम पकरिया में स्थित उनकी पुश्तैनी कृषि भूमि खसरा क्रमांक 180/1/1/1/1, रकबा 0.1283 हेक्टेयर (23.5 डिसमिल) है। इस भूमि का एक हिस्सा उन्होंने वैधानिक तरीके से बेचा था, जबकि शेष भूमि पर उनका स्वामित्व बरकरार है।
अमरनाथ साहू का आरोप है कि लल्लू केवट, शिवशंकर यादव, हेमलाल यादव, रोशनी यादव एवं अन्य लोगों ने मिलकर उनकी जमीन पर लगभग 43–44 डिसमिल तक जबरन कब्जा कर लिया है और बिना किसी अनुमति, सीमांकन या नक्शा-तरमीम के पक्के निर्माण खड़े किए जा रहे हैं। विरोध करने पर पीड़ित को गाली-गलौज, धमकी और जान से मारने की चेतावनी तक दी गई।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) सोहागपुर द्वारा इस भूमि विवाद में स्पष्ट रूप से ‘यथास्थिति बनाए रखने’ का स्थगन आदेश जारी किया गया है। यह आदेश दोनों पक्षों को किसी भी प्रकार का निर्माण, तोड़फोड़ या परिवर्तन करने से रोकता है। लेकिन पीड़ित के अनुसार, अतिक्रमणकारी न तो आदेश का पालन कर रहे हैं और न ही निर्माण कार्य रोकने को तैयार हैं। इसके विपरीत, वे लगातार निर्माण जारी रखते हुए खुलेआम यह कहते सुने जा रहे हैं कि “हुकुम चलाने वाले सब हमारे प्रभाव में हैं, आदेश हमें रोक नहीं सकता।”
पीड़ित का आरोप और भी गंभीर हो जाता है जब वह कहता है कि स्थगन आदेश के बावजूद बुढ़ार पुलिस मौके पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रही, बल्कि उल्टा आरोपियों को संरक्षण दे रही है। साहू का दावा है कि कई बार शिकायत के बाद भी पुलिस न तो निर्माण रुकवा रही है, न ही किसी आरोपी पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई कर रही है। इससे आरोपियों का मनोबल इतना बढ़ गया कि वे स्थगन आदेश को ही “कागज़ का टुकड़ा” बताकर खुलेआम नजरअंदाज कर रहे हैं।
अमरनाथ साहू ने बताया कि उन्होंने अपनी भूमि का सीमांकन भी विधिवत करवा लिया, जिसमें उनकी वास्तविक भूमि सीमा स्पष्ट है। इसके बाद भी कब्जाधारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। स्थिति यह है कि स्थगन के बाद भी दीवारें खड़ी की जा रही हैं, भवनों की नींव खोदी जा रही है और निर्माण का मटेरियल लगातार साइट पर पहुंचाया जा रहा है। पीड़ित का कहना है कि यदि प्रशासन अब भी नहीं जागा, तो उनकी पुश्तैनी जमीन हमेशा के लिए हाथ से निकल जाएगी।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यह मामला किसी एक परिवार की जमीन का विवाद नहीं, बल्कि एक बड़ा सवाल है कि क्या शहडोल जिले में कानून का कोई शासन बचा है या नहीं। जब एक एसडीएम स्तर का अधिकारी स्पष्ट स्थगन आदेश दे चुका है, तब भी यदि निर्माण रुकवाने में प्रशासन नाकाम है, तो यह सीधे तौर पर शासन की कार्यप्रणाली पर उंगली उठाता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने बुढ़ार क्षेत्र में चर्चाओं का माहौल बना दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि स्थगन आदेश भी कागज़ी साबित होने लगे तो फिर न्याय की उम्मीद किससे की जाए। कई ग्रामीणों ने बताया कि दबंग लंबे समय से क्षेत्र में विवादित कब्जों को लेकर सक्रिय हैं, और प्रशासन की निष्क्रियता के कारण ऐसे मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है।
पीड़ित ने जिला प्रशासन से यह मांग की है कि
स्थगन आदेश का तत्काल पालन सुनिश्चित कराया जाए,
अवैध निर्माण को तत्काल प्रभाव से रोका जाए,
आरोपियों पर अवैध कब्जा, आपराधिक धमकी, धोखाधड़ी और आदेश उल्लंघन की धाराओं में मामला दर्ज किया जाए,
और बुढ़ार पुलिस की भूमिका की भी उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिला प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर क्या कदम उठाता है। क्या कानून की मर्यादा और एसडीएम के आदेशों को सम्मान मिलेगा, या फिर एक बार फिर दबंगों के सामने प्रशासन बेबस और निरीह दिखाई देगा?
ग्राम पकरिया का यह मामला शहडोल जिले में कानून-व्यवस्था की साख और प्रशासनिक तत्परता की वास्तविक परीक्षा बन चुका है।




