भारत के मुख्य न्यायाधीश ने छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी की गौरवशाली विरासत को चिह्नित करते हुए ई-स्मारिका का डिजिटल विमोचन किया


रायपुर / Chhattisgarh High Court द्वारा होटल बेबीलॉन कैपिटल, रायपुर में भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के सम्मान में एक गरिमामय अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया।
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति पमिदिघनतम नरसिम्हा तथा न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा, मुख्य न्यायाधीश, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की गरिमामयी उपस्थिति रही।
भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी की ई-स्मारिका का डिजिटल विमोचन किया। “नर्चरिंग द फ्यूचर ऑफ द ज्यूडिशियरी” शीर्षक वाली यह डिजिटल प्रकाशन वर्ष 2003 में स्थापना के बाद से अकादमी की उत्कृष्ट यात्रा को रेखांकित करती है।
अपने स्वागत भाषण में न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने मुख्य न्यायाधीश का अभिनंदन करते हुए कहा कि संवैधानिक मूल्यों और न्यायिक निष्पक्षता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता संपूर्ण न्यायिक समुदाय को प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि यह ई-स्मारिका अकादमी की परिवर्तनकारी यात्रा का सजीव दस्तावेज है, जो न्यायिक शिक्षा, आधारभूत संरचना के विकास और डिजिटल युग के अनुरूप अनुकूलन को दर्शाती है।
न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा तथा न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा का स्वागत करते हुए कहा कि उनका व्यक्तित्व विधि के शासन के प्रति समर्पण का प्रतीक है। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा का उच्च न्यायालय से जुड़ाव स्थानीय न्यायाधीशों और अधिवक्ता समुदाय को प्रेरित करता है।
अपने संबोधन में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि ऐसे सम्मान समारोह संस्थाओं के लिए आत्मचिंतन और सामूहिक गौरव के क्षण होते हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक न्यायाधीश को सिद्धांतों में अडिग, आचरण में संतुलित और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा में तत्पर रहना चाहिए। न्यायालय स्वयं को समाज से पृथक नहीं कर सकते; उन्हें राज्य के प्रत्येक जिले—दंतेवाड़ा, बस्तर, सरगुजा सहित—तक अपनी संवेदनशीलता का विस्तार करना चाहिए।
उन्होंने छत्तीसगढ़ को भारत की विविधता का लघुरूप बताते हुए कहा कि “छत्तीसगढ़” का पारंपरिक अर्थ “छत्तीस किलों की भूमि” है। संवैधानिक न्यायालय लोकतंत्र के आधुनिक किले हैं, जो भूभाग की नहीं, अधिकारों और संवैधानिक मर्यादाओं की रक्षा करते हैं।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय भले ही अपेक्षाकृत युवा हो, किंतु उसने उच्च मानदंड स्थापित किए हैं। न्यायिक अकादमी केवल प्रशिक्षण केंद्र नहीं, बल्कि न्यायपालिका की भावी शक्ति का निर्माण स्थल है।
कार्यक्रम का शुभारंभ न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा के स्वागत भाषण से हुआ तथा समापन न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। समारोह में उच्च न्यायालय के न्यायाधीशगण, न्यायमूर्ति पी. सैम कोशी (तेलंगाना उच्च न्यायालय), विधि विभाग के प्रमुख सचिव, रजिस्ट्रार जनरल, रजिस्ट्री के अधिकारी, रायपुर जिला के न्यायाधीश तथा उच्च न्यायालय के कर्मचारी उपस्थित



