प्रेम बदले प्रेम व्यवहार, अकारण प्रेम सिर्फ माता पिता करते है: पंडित शर्मा
वृक्ष,पर्वत,नदियों व राष्ट्र के प्रति देवतुल्य भाव रखे

प्रदेश का गौरव(PKG)भाटापारा। गीताबाई अग्रवाल एवं समस्त गर्ग परिवार द्वारा छत्तीसगढ़ी अग्रवाल समाज भवन में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में भाटापारा निवासी पंडित हरगोपाल शर्मा ने भगवान के दिव्यादि दिव्य चरित्रों की पावन कथा को बड़े ही सुन्दर ढंग से बताया भागवत पुराण के विषय में उन्होंने कहा जैसे क्षेत्रों में काशी, बहने वालों में गंगा,देवताओं में कृष्ण व वैष्णवों में शंकर श्रेष्ठ है वैसे ही पुराणों में श्रीमद् भागवत श्रेष्ठ है भागवत पुराणों का तिलक व विशुद्ध प्रेम शास्त्र है जिसके आश्रय से व्यक्ति की समस्त कामनाओं की पूर्ति होती है ।

राम जन्म व कृष्ण जन्म की कथा को बड़े ही सुन्दर ढंग से सुनाते हुए कहा कि सूर्यवंश व चन्द्रवंश की ये विशेषता रही कि सूर्यवंश में सूर्य से लेकर दशरथ तक अधिकांश राजाओं ने यज्ञ किया तभी उनके पुत्र हुआ चंद्रवंश में चंद्रमा से लेकर भगवान द्वारकानाथ व उनके पुत्रों का विवाह राजी से नहीं हुआ उसमें झगड़ा जरूर हुआ ।जब जब इस धरा में पाप की वृद्धि होती है तब तब भगवान विभिन्न रूपों में अवतरित हो पापियों का नाश कर इस धरा पर पुनःधर्म की स्थापना करते है ।कृष्ण जन्म पर श्रद्धालु गण नन्द के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की, लाला जनम सुन आई यशोदा दे दो बधाई व अन्य भजनों पर झूमते नाचते रहे भगवान के बाल चरित्रों के साथ ही गोवर्धन पूजन पर उन्होंने कहा कि भगवान ने इंद्र की पूजा बंद करा पर्वत की पूजा करा हमें प्रकृति के पूजन का संदेश दिया उन्होंने कहा कि हमे वृक्ष,पर्वत,नदियों,तालाबों का संरक्षण करना चाहिए व इनके प्रति देवतुल्य भाव रखना चाहिए । महारास के प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि भगवान ने काम को जीतने के लिए ही महारास किया और यह स्त्री और पुरुष का नहीं जीव व जीवात्मा का मिलन था जैसे नन्हा शिशु अपनी ही परछाई से क्रीड़ा करता है वैसे ही भगवान ने गोपियों के साथ दिव्य रास किया गोपियों ने कहा प्रभु संसार में तीन तरह के लोग रहते है पहले जो प्रेम के बदले प्रेम करते है दूसरे वो जो अकारण प्रेम करते है और तीसरे जो किसी से प्रेम नहीं करते तब भगवान ने कहा जो प्रेम के बदले प्रेम व्यवहार ,अकारण प्रेम सिर्फ माता पिता करते है और जो किसी से प्रेम नहीं करते वो आत्माराम, आप्तकाम अकृतग्य और गुरु द्रोही होते है ।उद्धव चरित्र पर पंडित हरगोपाल जी ने कहा बृहस्पति के परम ज्ञानी शिष्य का ज्ञान गोपियों के प्रेमभाव के आगे नतमस्तक हो गया । उद्धव प्रसंग में हम प्रेम दीवानी है वो प्रेम दीवाना, ऐ उद्यों हमे ज्ञान की पोथी ना सुनाना, भजन सुन श्रोता भाव विभोर हो गए।






