तीन माह बाद अमलाई ओसीएम खदान से बरामद हुआ मृतक अनिल कुशवाहा का शव
एनडीआरएफ व सोहागपुर रेस्क्यू टीम की ऐतिहासिक सफलता, ठंडे पानी में उतरकर रचा साहस का उदाहरण

शहडोल/धनपुरी (मोहम्मद असलम बाबा) बीते 11 अक्टूबर2025 को अमलाई ओसीएम खदान में हुए दर्दनाक हादसे के करीब तीन माह बाद आखिरकार मृतक अनिल कुशवाहा का शव बरामद कर लिया गया। हादसे के दिन डोजर पलटने से अनिल कुशवाहा डोजर सहित खदान के गहरे पानी में समा गया था। घटना के तुरंत बाद एनडीआरएफ व सोहागपुर एरिया की रेस्क्यू टीम ने कई दिनों तक सघन खोज अभियान चलाया, लेकिन पानी की अधिकता और गहराई के कारण शव का कोई सुराग नहीं मिल पाया, जिसके चलते ऑपरेशन अस्थायी रूप से स्थगित करना पड़ा था।इसके बाद बीते लगभग तीन महीनों से खदान से बड़ी-बड़ी मोटरों के माध्यम से लगातार पानी निकाला जा रहा था। सोमवार शाम पानी का स्तर कम होते ही डोजर नजर आया। इसकी सूचना अमलाई ओसीएम प्रबंधन द्वारा उच्च अधिकारियों को दी गई। सूचना मिलते ही रेस्क्यू प्रभारी अमरजीत सिंह अपने दल के साथ मौके पर पहुंचे और शव को डोजर से बाहर निकालने की रणनीति तैयार की गई।

*कुशल नेतृत्व में मिला निर्णायक परिणाम*
एनडीआरएफ टीम, सोहागपुर रेस्क्यू एरिया, सुमित कुमार गुर्जर तहसीलदार बुढ़ार,नायब तहसीलदार मनोज सिंह,एसडीओपी धनपुरी विकास पांडे के कुशल नेतृत्व में यह जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। मौके पर धनपुरी थाना प्रभारी खेम सिंह पेंदो, बुढ़ार थाना प्रभारी विनय सिंह, अमलाई थाना प्रभारी जय प्रकाश शर्मा सहित भारी पुलिस बल मौजूद रहा। आरकेटीसी कंपनी का पूरा स्टाफ भी घटनास्थल पर उपस्थित रहा।
कड़ाके की ठंड और पानी में उतरकर काम करने के कारण रेस्क्यू टीम को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन अंततः अथक प्रयास रंग लाया। एनडीआरएफ और सोहागपुर रेस्क्यू टीम ने वह कर दिखाया, जिसकी कल्पना भी आसान नहीं थी। तीन माह पहले डूबे डोजर से शव को निकालने में मिली इस सफलता की हर ओर सराहना हो रही है।

*पूर्व मे परिजनो ने लगाया था आरोप*
पहले से दर्ज है एफआईआर, जांच के घेरे में कंपनी और सुरक्षा व्यवस्था
इस मामले में धनपुरी थाने में पहले ही एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। मृतक के परिजनों ने एसईसीएल और आरकेटीसी कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत के अनुसार, करीब 15 वर्षों से बंद खदान में बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजामों के खतरनाक डंपिंग व फिलिंग कार्य कराया गया।
न तो वहां फेसिंग थी, न चेतावनी बोर्ड, न सुरक्षा अधिकारी और न ही कोई आपात बचाव व्यवस्था। बारिश के कारण खदान में लगभग 80 मीटर गहरा जलाशय पूरी तरह भरा हुआ था, फिर भी मजदूरों से जोखिमपूर्ण कार्य कराया गया।
परिजनों का आरोप है कि हादसे के बाद सूचना देने में जानबूझकर देरी की गई और दस्तावेजों में गड़बड़ी कर घटना की गंभीरता को छुपाने का प्रयास हुआ। सूत्रों के अनुसार, एसईसीएल में पदस्थ एक सुरक्षा अधिकारी पर भी कंपनी के साथ मिलीभगत कर मजदूरों की जान जोखिम में डालने के आरोप लगे हैं। हालांकि इन दावों की सच्चाई पुलिस जांच और एसईसीएल की विभागीय जांच के बाद ही सामने आएगी।
*इनका रही सराहनीय भूमिका*
एस डी ओपी पुलिस विकास पांडे, थाना धनपुरी, थाना बुढ़ार, थाना अमलाई की प्रभारियो समेत पूरा स्टाफ सुरक्षा मे लगा रहा साथ ही
इस ऑपरेशन में आर.डी. पटेल (प्रभारी अधिकारी), रेस्क्यू सोहागपुर एरिया), अमरजीत सिंह (कैप्टन), श्रेयस राव, अमित वायकर, आदित्य प्रकाश, अशोक रजक, अनिल चौधरी, अयोध्या यादव, विनीत दुबे, विनय तिवारी सहित पूरी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
*क्या होगी निष्पक्ष जाँच?*
तीन माह बाद शव की बरामदगी से जहां परिजनों को कुछ हद तक सुकून मिला है, वहीं यह मामला खनन क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों, जिम्मेदारी और जवाबदेही पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब सभी की निगाहें जांच के नतीजों पर टिकी हैं।
*इनका कहना है…*
शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है,पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने की पश्चात शव को परिजनों के सुपुर्द कर दिया जाएगा ताकि वो उनका अंतिम क्रिया कर्म के लिए आपने ग्रह ग्राम ले जा सके ।
*विकास पांडे*
*एसडीओपी पुलिस धनपुरी*

