इंट्रो
शराब पर हिंदी फिल्मो में न जाने कितने गीत लिखे गए होंगे परंतु इन दिनों सामूचे एमसीबी जिले में हर तरफ मध्यप्रदेश की दारू गोवा क़े चर्चे सरेआम हों रहे हैं, पान ठेलो से लेकर ढाबो तक हर तरफ बस दारू ही दारू नज़र आ रही हैं, हों भी क्यू न शराब तस्करो द्वारा कम रेट पर दारू दे कर अपना फायदा तो देख रहे पर छत्तीसगढ़ शासन क़ो लाखो रुपए की प्रतिदिन चपत भी लग रही, इस पर अबकारी विभाग मौन हैं, छत्तीसगढ़ में शराब स्कैण्डल होना कोई नई बात नहीं हैं, पूर्व की सरकार क़े कई मंत्री आला अधिकारी भी इस दारू क़े खेल में फस कर अपनी किरकिरी करवा रहे हैं, जानकारों की माने तो वही एमसीबी जिले का आबकारी विभाग हाँथो में मेहंदी लगाए बैठा हुआ हैं, गाहे ब गाहे एकाध केस मिल जाता हैं तो उसी में पूरे महीने तारीफ़ बटोरते नहीं थकते
एमसीबी,। इस समय समूचा एम सीबी जिला शराब तस्करो क़े लिए शराब का गढ़ बना हुआ हैं,पडोसी राज्य मध्यप्रदेश से तस्करी क़े माध्यम से शराब तस्कर भारी मात्रा में शराब ला कर सामूचे एमसीबी जिले में खपा रहे हैं, मध्यप्रदेश से सटे होने की वजह से शराब माफिया पक्की सड़को की जगह अब जंगल और कच्ची सड़को का सहारा ले रहे हैं, जानकारी अनुसार इन दिनों शराब माफिया राजनगर रामनगर क़े जंगलो से भारी मात्रा में शराब की तस्करी कर रहे हैं, वही जनकपुर क़े जंगलो से होते हुए शराब तस्कर मनेन्द्रगढ़, चिरमिरी नागपुर और आस पास क़े इलाको में मध्यप्रदेश की शराब पंहुचा रहे हैं जिससे छत्तीसगढ़ शासन क़ो प्रतिदिन लाखो रुपए की चपत लग रही हैं, जानकारी अनुसार अबकारी विभाग सिर्फ सड़क से आने वालों की चेकिंग कर कोरम पूरा कर रही हैं, और शराब तस्कर पुलिस और आबकारी विभाग क़े नाक क़े नीचे से शराब तस्करी का काला खेल खेल रहे हैं!
अवैध शराब के कारोबार का जाल बड़ी तेजी से एम सीबी जिले में फैल रहा है। गली-मोहल्लों से लेकर ढाबों पान ठेलो में शराब की खुलेआम बिक्री हो रही है। इस पर समय-समय पर पुलिस और विभागीय कार्यवाही जरूर होती है, लेकिन इन कार्रवाइयों का प्रभाव सीमित ही नजर आता है।अब देखना यह हैं की क्या आबकारी विभाग पूरी ईमानदारी से इस पर कब तक रोक लगाता हैं!
*बड़े शराब तस्करो पर क्यों नहीं हो रही कार्रवाई?*
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की कार्यवाही छोटे कोचियों तक ही सीमित रहती है, जबकि बड़े शराब तस्कर प्रशासन की पकड़ से दूर हैं। इसके चलते कई लोग थाने और आबकारी विभाग पर संरक्षण देने के आरोप भी लगा रहे हैं। शाम होते ही शराब के अवैध अड्डों पर ग्राहकों की भीड़ इस स्थिति की गंभीरता को दर्शाती है।
*पान ठेलो और ढाबों से भी चलता हैं नशे का कारोबार*
थाना क्षेत्र के ढाबों में भी अवैध शराब बिकने की शिकायतें आम हो गई हैं। बावजूद इसके इन पर कठोर कार्यवाही का अभाव समझ से परे है। शिकायत करने वाले नागरिकों को अक्सर धमकियां दी जाती हैं और उनके साथ बदसलूकी भी की जाती है।
*नशे की चपेट में युवा और महिलाएं*
यह स्थिति न केवल परिवारों में अशांति और हिंसा बढ़ा रही है, बल्कि युवा पीढ़ी और महिलाओं को भी नशे की लत की ओर धकेल रही है। फिल्मों में बढ़ते चकाचौध और ग्लैमरस के लिए युवा पीढ़ी अपने आप को गर्त की ओर धकेल रही है, आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपैया, फिल्मों में दिखाए जाने वाले किरदारों को अपने आप में संजोकर जब युवा शराब के नशे में टल्ली होता है तो निश्चय ही यह अच्छे संकेत नहीं है,
इससे सामाजिक बुराइयों और अपराधों में भी इजाफा हो रहा है।
*क्या हैं प्रशासन की जिम्मेदारी और समाज की भूमिका*
प्रशासन भले ही जागरूकता अभियानों के माध्यम से नशा मुक्ति का संदेश दे रहा हो, लेकिन ज़मीनी हकीकत अलग है। समाज के लोग भी इस बुराई के खिलाफ उठने में झिझकते हैं। इसके पीछे डर और अवैध कारोबारियों का दबदबा एक बड़ा कारण है।
*कब होगा समाधान?*
आमजन और प्रशासन के बीच समन्वय और दृढ़ता से कार्यवाही की जरूरत है। जब तक बड़े शराब माफियाओं पर शिकंजा नहीं कसा जाएगा, तब तक यह समस्या जस की तस बनी रहेगी।
अब देखना यह है कि एमसीबी क्षेत्र में अवैध शराब और नशीले पदार्थों के खिलाफ निर्णायक कार्यवाही कब और कैसे होती है। क्या प्रशासन इन सामाजिक बुराइयों को खत्म करने में सफल होगा, या यह समस्या यूं ही बढ़ती रहेगी?