अधिकारों के लिए लड़ना और संस्कृति की रक्षा करनी होगी: प्रो. जगमोहन सिंह, शहीदे आज़म भगतसिंह के भांजे शाजापुर आए

शाजापुर। आजादी का अर्थ केवल राजनीतिक स्वतंत्रता से नहीं है, बल्कि यह हमारे विचारों, हमारी संस्कृति और समाज की स्वतंत्रता से भी जुड़ा हुआ है। हमें अपनी आजादी को बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयास करने होंगे। अपने अधिकारों के लिए लड़ना होगा, हमें अपनी संस्कृति और अपने समाज की रक्षा करनी होगी। यह बात गुरुवार को ईदगाह रोड़ स्थित अंजुमन कमेटी के आयोजन में महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शहीदे-आज़म भगत सिंह जी के भांजे सुप्रसिद्ध लेखक, चिंतक और इतिहासकार प्रोफेसर जगमोहन सिंह ने कही। उन्होंने देश-दुनिया के मौजूदा हालात पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि भगतसिंह का पैगाम इंसानियत है और आज एकता, भाईचारे की बेहद ज़रूरत है। सभी समाज जाति, धर्म और पंथ के लोगों के बीच प्यार का रिश्ता तरक्की के मार्ग पर ले जाएगा। देश का इतिहास कोई किस्सा कहानी नही है, उसे गहराई से आत्मसात कर युवा सपनों का भारत बना सकते हैं, जहां तालीम से लेकर तरक्की तक हर हिंदुस्तानी के लिए मुहैया हो।
प्रोफेसर जगमोहन सिंह ने आजादी के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि जनरल डायर जैसे ज़ालिम अंग्रेज़ों को देश के लोगों की एकता ने भयभीत कर दिया था। जलियां वाला बाग़ जैसा कांड अंग्रेज़ों की बोखलाहट का नतीजा था। गोरे आज़ादी के मतवालों को नरसंहार कर भयभीत करना चाहते थे, मगर नतीजा उलट हुआ और हर धर्म, ज़ात बिरादरी के लोग एकता के साथ देश की आज़ादी को हासिल करने का संकल्प लेकर हर हद को पार करने में जुट गए। स्वागत करते हुए काज़ी एहसान उल्ला ने कहा कि भारत की आज़ादी के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीदे आज़म भगतसिंह का ये देश सदैव ऋणी रहेगा। आज उनके भांजे को अपने बीच पाकर हम गौरवान्वित हैं। भगतसिंह जी का बलिदान देश की एकता और भाईचारे के लिए अमर है। अंजुमन कमेटी के सदर हाजी नईम कुरैशी ने कहा कि शहीदे आज़म भगतसिंह देश हीरो हैं। उनकी क़ुर्बानी ने हिंदुस्तान की आज़ादी में जो किरदार अदा किया, उसकी कोई मिसाल नही है। जगमोहन जी को अपने बीच पाकर हम शहीदे आज़म का स्मरण कर रहे हैं। हमें गर्व और गौरव है कि हम उस देश के वासी हैं, जहां आज़ादी के लिए फांसी का फंदा चूम कर अपने प्राणों को न्योछावर करने वाले शूरवीर भगतसिंह सिंह पैदा हुए हैं।







