मध्यप्रदेश

दबंगों के हौसले बुलंद: SECL अधिकारी को घेरा, दी जान से मारने की धमकी; ‘मुझ पर पहले से केस हैं, तुझे भी नहीं छोड़ूंगा’

भालूमाड़ा (अनूपपुर) |मोहम्मद असलम बाबा सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाना एक प्रशासनिक अधिकारी को भारी पड़ गया। जमुना क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 7 में अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के दौरान न केवल शासकीय कार्य में बाधा डाली गई, बल्कि ड्यूटी पर तैनात अधिकारी को सरेआम मां-बहन की भद्दी गालियां देते हुए जान से मारने की धमकी दी गई। मामला SECL जमुना कोतमा क्षेत्र के महाप्रबंधक (संचालन) के निज सहायक एवं संपदा अधिकारी सोमेश्वर नारायण पाठक से जुड़ा है, जिन्होंने अब भालूमाड़ा थाना पुलिस से अपनी जान की सुरक्षा की गुहार लगाई है।

भीड़ के सामने दी चुनौती: ‘जेल जाने का डर नहीं’

शिकायत के अनुसार, अधिकारी सोमेश्वर नारायण पाठक प्रबंधन के आदेश पर विभागीय टीम, सुरक्षा बल और जेसीबी के साथ खसरा नंबर 1098 स्थित जर्जर कार गैरेज और अवैध अतिक्रमण हटाने पहुंचे थे। कार्रवाई शुरू होते ही स्थानीय निवासी श्रीमती खुर्शीद बेगम, शफीक खान, रवि खान और एक अज्ञात महिला ने उन्हें घेर लिया।

दबंगई का आलम यह था कि लगभग 50 लोगों की भीड़ के सामने अधिकारी को गालियां दी गईं। आरोपी रवि खान ने खुलेआम चुनौती देते हुए कहा, “मुझे जेल जाने का डर नहीं है, मुझ पर पहले से बहुत केस चल रहे हैं। एक और सही, पर तुझे नहीं छोड़ूंगा।” आरोपियों ने धमकी दी कि ड्यूटी से घर लौटते वक्त उनका “इंतजाम” कर दिया जाएगा।

चरित्र हनन की साजिश और झूठे केस की धमकी

घटनाक्रम यहीं नहीं रुका। भीड़ में शामिल एक अज्ञात महिला ने अधिकारी को झूठे चरित्र हनन के मामले (Sexually harassment/False cases) में फंसाने की धमकी दी। पीड़ित अधिकारी का कहना है कि वे उसी क्षेत्र के निवासी हैं और प्रतिदिन आरोपियों के घर के सामने से गुजरना पड़ता है, जिससे उनके और उनके परिवार के ऊपर जान का खतरा मंडरा रहा है।

प्रशासनिक लाचारी या पुलिस की सुस्ती?

हैरानी की बात यह है कि पुलिस को पूर्व में सूचना देने और सुरक्षा बल की मौजूदगी के बावजूद आरोपियों ने कानून को ठेंगे पर रखा। सरकारी अधिकारी के साथ धक्का-मुक्की और अभद्रता यह दर्शाती है कि इलाके में असामाजिक तत्वों के मन से कानून का खौफ खत्म हो चुका है।

मुख्य बिंदु जो सवाल खड़े करते हैं:

सरेआम धमकी: क्या अब सरकारी ड्यूटी करना जान जोखिम में डालना है?

अतिक्रमण का रसूख: क्या अपराधियों को राजनीतिक या स्थानीय संरक्षण प्राप्त है?

सुरक्षा पर सवाल: यदि एक राजपत्रित अधिकारी के सहायक सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता का क्या होगा?

कार्रवाई की मांग

पीड़ित सोमेश्वर नारायण पाठक ने थाना प्रभारी को लिखित शिकायत सौंपकर चारों नामजद आरोपियों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा, गाली-गलौज, मारपीट का प्रयास और जान से मारने की धमकी के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि भविष्य में उनके साथ होने वाली किसी भी अनहोनी की जिम्मेदारी इन्हीं व्यक्तियों की होगी।

जनता की विशेष टिप्पणी:

जब रक्षक ही सुरक्षित नहीं, तो भक्षक बेखौफ ही रहेंगे। सरकारी जमीन कब्जाने वाले भू-माफियाओं और गुंडा तत्वों पर अगर आज नकेल नहीं कसी गई, तो कल किसी बड़ी अप्रिय घटना से इनकार नहीं किया जा सकता। पुलिस को चाहिए कि वह ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजे।

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